- बहती नदी में या तालाब में नहीं डालना चाहिए मुरझाए हुए फूल, इससे पानी गंदा होता है
Dainik Bhaskar
Jul 10, 2019, 01:10 PM ISTजीवन मंत्र डेस्क। पूजा-पाठ में भगवान की प्रतिमाओं और मूर्तियों पर हार-फूल चढ़ाने की परंपरा है। अनिवार्य रूप से इस परंपरा का पालन किया जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार भगवान को फूल चढ़ाने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इसी मान्यता की वजह से सभी लोग अपने घर के मंदिर में भी ये पुण्य कर्म जरूर करते हैं। दो-तीन बाद हार-फूल मुरझा जाते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ मुरझाए हुए फूल नदी या तालाब में प्रवाहित कर देते हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। नदी-तालाब में खराब फूल डालने से पानी गंदा होता है।
> पं. शर्मा के अनुसार भगवान को चढ़ाए हुए हार-फूल जब मुरझा जाए तो उन्हें मंदिर से हटाकर अपने माथे से लगाएं और फिर घर के आंगन में तुलसी के पौधे में या किसी अन्य बाग में या किसी मंदिर के पेड़-पौधों की जड़ों में डाल देना चाहिए।
> हार-फूल ऐसी जगह पर डालना चाहिए, जहां इनका अपमान न हो और किसी के पैर इन पर नहीं लगते हैं। पेड़-पौधों में मुरझाए हुए फूल डालने से ये खाद का काम करते हैं। इनकी वजह से पेड़-पौधों को पोषक तत्व मिलते हैं।
> भगवान को अर्पित की गई सभी वस्तुएं पवित्र होती हैं और किसी भी प्रकार इनका अपमान नहीं करना चाहिए, वरना पूजा-पाठ से शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाते हैं। ध्यान रखें भगवान को चढ़ाया गया प्रसाद भी अधिक समय तक नहीं रखना चाहिए, इसे अन्य भक्तों में वितरीत कर देना चाहिए। अगर प्रसाद बच जाता है तो खराब होने से पहले किसी गाय या कुत्ते को खिला देना चाहिए।