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शास्त्र/ चतुर्दशी तिथि पर नहीं करना चाहिए श्राद्ध, ऐसा करने से आतीं हैं मुसीबत

Dainik Bhaskar | Sep 26, 2018, 02:10 PM IST

रिलिजन डेस्क. हिंदू धर्म के अनुसार पितृपक्ष में परिजनों की मृत्यु की तिथि के अनुसार ही श्राद्ध किया जाता है, लेकिन कया आपको पता है पितृपक्ष की चतुर्दशी तिथि जो इस बार 7 अक्टूबर को है इस दिन श्राद्ध करने की मनाही है। महाभारत के अनुसार, इस दिन केवल उन्ही का श्राद्ध करना चाहिए, जिनकी अकाल मृत्यु जैसे किसी दुर्घटना में हुई हो। इस तिथि पर अकाल मृत्यु (दुर्घटना, आत्महत्या आदि) को प्राप्त पितरों का श्राद्ध करने का ही महत्व है। इस तिथि पर स्वाभाविक रूप से मृत परिजनों का श्राद्ध करने से श्राद्ध नहीं किया जाता। ऐसी स्थिति में उन परिजनों का श्राद्ध सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के दिन किया जाता है। Advertisement

कई जगह मिलता है जिक्र

  1. चतुर्दशी तिथि पर अकाल मौत मरने वालों का श्राद्ध किया जाता है। अकाल मृत्यु से अर्थ है जिसकी मृत्यु हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना आदि कारणों से हुई है। जिन पितरों की मृत्यु ऊपर लिखे कारणों से हुई हो या उनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो उनका श्राद्ध इस तिथि को करने से वे प्रसन्न होते हैं।

    चतुर्दशी तिथि पर अकाल मौत मरने वालों का श्राद्ध किया जाता है। अकाल मृत्यु से अर्थ है जिसकी मृत्यु हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना आदि कारणों से हुई है। जिन पितरों की मृत्यु ऊपर लिखे कारणों से हुई हो या उनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो उनका श्राद्ध इस तिथि को करने से वे प्रसन्न होते हैं।

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  2. महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया है कि जो लोग आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को तिथि अनुसार श्राद्ध करते हैं उन्हे कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस तिथि के दिन जिन लोगों की मृत्यु स्वाभाविक रूप से हुई हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के दिन करना उचित रहता है।

  3. कूर्मपुराण के अनुसार चतुर्दशी को श्राद्ध करने से अयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।

  4. याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार इस तिथि पर श्राद्ध करने से श्राद्ध करने वाले को भविष्य में कई तरह के विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

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