धर्म / 11 जनवरी से शुरू होगा माघ मास, इस महीने में श्रीकृष्ण पूजा और नदी स्नान का है विशेष महत्व

  • माघ महीने में गंगा का नाम लेकर स्नान करने से गंगा स्नान का फल मिलता है

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2020, 03:50 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. हिंदू पंचांग के अनुसार, साल के 11वें महीने का नाम माघ है। धर्म शास्त्रों में इस महीने को बहुत पवित्र माना गया है। इस बार माघ मास का प्रारंभ 11 जनवरी, शनिवार से हो रहा है, जो 9 फरवरी, रविवार तक रहेगा। इस मास में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने तथा नदी स्नान करने से मनुष्य स्वर्गलोक में स्थान पाता है। माघ मास की ऐसी महिमा है कि इसमें गंगा का नाम लेकर स्नान करने से गंगा स्नान का फल मिलता है।

  • धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस महीने में यदि विधिपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाए तो सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। माघ मास में विधिपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण की पूजा से पहले सुबह तिल, जल, फूल, कुश लेकर इस प्रकार संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद श्रीकृष्ण की प्रार्थना और पूजा करें। श्रीकृष्ण को घर में शुद्धतापूर्वक बने पकवानों का भोग लगाएं। उसमें तुलसी के पत्ते जरूर डालें।
  • इस तरह पूरे माघ मास में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से दुख दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि रहती है। माघ मास की ऐसी महिमा है कि इसमें जहां कहीं भी जल हो, वह गंगाजल के समान होता है, फिर भी प्रयाग, काशी, नैमिषारण्य, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है।

माघ मास की कथा

  • प्राचीन काल में नर्मदा के तट पर सुव्रत नामक एक ब्राह्मण रहते थे। वे समस्त वेद-वेदांगों, धर्मशास्त्रों व पुराणों के ज्ञाता थे। वे अनेक देशों की भाषाएं व लिपियां भी जानते थे। इतना विद्वान होते हुए भी उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग धर्म के कामों में नहीं किया।
  • पूरा जीवन केवल धन कमाने में ही गवां दिया। जब सुव्रत बूढ़े हो गए तब उन्हें याद आया कि मैंने धन तो बहुत कमाया, लेकिन परलोक सुधारने के लिए कोई काम नहीं किया। यह सोचकर वे पश्चाताप करने लगे।
  • उसी रात चोरों ने उनके धन को चुरा लिया, लेकिन सुव्रत को इसका कोई दु:ख नहीं हुआ क्योंकि वे तो परमात्मा को प्राप्त करने के लिए उपाय सोच रहे थे। तभी सुव्रत को एक श्लोक याद आया-
  • माघे निमग्ना: सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।
  • सुव्रत को अपने उद्धार का मूल मंत्र मिल गया। सुव्रत ने माघ स्नान का संकल्प लिया और नौ दिनों तक प्रात: नर्मदा के जल में स्नान किया। दसवें दिन स्नान के बाद उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया।
  • सुव्रत ने जीवन भर कोई अच्छा काम नहीं किया था, लेकिन माघ मास में स्नान करके पश्चाताप करने से उनका मन निर्मल हो चुका था। जब उन्होंने अपने प्राण त्यागे तो उन्हें लेने दिव्य विमान आया और उस पर बैठकर वे स्वर्गलोक चले गए।

माघ मास का महत्व

जिन मनुष्यों को चिरकाल तक स्वर्गलोक में रहने की इच्छा हो, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर पवित्र नदी में सुबह स्नान करना चाहिए। महाभारत और अन्य ग्रंथों में माघ मास के महत्व के बारे में बताया गया है। महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार जो माघ मास में नियमपूर्वक एक समय भोजन करता है, वह धनवान कुल में जन्म लेकर अपने कुटुम्बीजनों में महत्व को प्राप्त होता है। इसी अध्याय में कहा गया है कि माघ मास की द्वादशी तिथि को दिन-रात उपवास करके भगवान माधव की पूजा करने से उपासक को राजसूययज्ञ का फल प्राप्त होता है और वह अपने कुल का उद्धार करता है।

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