- पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शाकंभरी नवरात्र शुरू होता है, जो पौष पूर्णिमा को समाप्त होता है
Dainik Bhaskar
Jan 07, 2020, 11:47 PM ISTजीवन मंत्र डेस्क.10 जनवरी, शुक्रवार को पौष मास की पूर्णिमा है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, इस दिन माता शाकंभरी की जयंती मनाई जाती है। माता शाकंभरी को देवी दुर्गा की ही रूप माना जाता है। माना जाता है कि पौष मास की पूर्णिमा तिथि को मां दुर्गा ने मानव कल्याण के लिए शाकंभरी रूप लिया था। मां दुर्गा के इस अवतार के पीछे एक कथा है।
इसलिए माता दुर्गा ने लिया शाकंभरी अवतार
ऐसा है माता शाकंभरी का स्वरूप
- मार्कंडेय पुराण के अनुसार देवी शाकंभरी आदिशक्ति दुर्गा के अवतारों में एक हैं। दुर्गा के सभी अवतारों में से रक्तदंतिका, भीमा, भ्रामरी, शाकंभरी प्रसिद्ध हैं। दुर्गा सप्तशती के मूर्ति रहस्य में देवीशाकंभरी के स्वरूप का वर्णन इस प्रकार है
मंत्र
शाकंभरी नीलवर्णानीलोत्पलविलोचना।
मुष्टिंशिलीमुखापूर्णकमलंकमलालया।।
अर्थ - देवी शाकंभरी का वर्ण नीला है, नील कमल के सदृश ही इनके नेत्र हैं। ये पद्मासना हैं अर्थात् कमल पुष्प पर ही विराजती हैं। इनकी एक मुट्ठी में कमल का फूल रहता है और दूसरी मुट्ठी बाणों से भरी रहती है।