रामायण / हर परस्थिति में अपनी शक्तियों पर पूरा भरोसा रखें, तभी सफलता मिल सकती है

  • जब विभीषण श्रीराम के पास पहुंचे, तो सुग्रीव ने श्रीराम से कहा था कि हमें इसे बंदी बना लेना चाहिए

Dainik Bhaskar

Aug 24, 2019, 01:44 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। श्रीरामचरित मानस के प्रसंग में जब भगवान श्रीराम के साथ वानर सेना समुद्र किनारे तक पहुंच गई थी, तब समुद्र को पार करने पर विचार किया जा रहा था। उसी समय लंका में भी भावी युद्ध को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। रावण ने अपने मंत्रियों से राय मांगी तो सारे मंत्रियों ने यह कह दिया कि जब देवताओं और दानवों को जीतने में कोई श्रम नहीं किया तो मनुष्य और वानरों से क्या डरना?

  • उस समय विभीषण ने रावण को बहुत समझाया कि श्रीराम से संधि कर लेनी चाहिए। सीता को आदर सहित श्रीराम को लौटा दिया जाए तो राक्षस कुल बच सकता है। रावण विभीषण की इस बात पर गुस्सा हुआ और उसे लात मारकर अपने राज्य से निकाल दिया। इसके बाद विभीषण श्रीराम की शरण में जाना चाहते थे। इसलिए वे श्रीराम के पास पहुंचे। शत्रु रावण के भाई को देखकर वानर सेना में खलबली मच गई। सुग्रीव ने श्रीराम को सुझाव दिया कि विभीषण राक्षस है और रावण का छोटा भाई भी है, इसे बंदी बना लेना चाहिए। हो सकता है यह हमारी सेना का भेद जानने आया हो।
  • श्रीराम ने सुग्रीव को जवाब दिया कि हमें हमारे बल और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है। विभीषण शरण लेने आया है, इसलिए उसे बंदी नहीं बनाना चाहिए। अगर वो भेद लेने भी आया है तो भी कोई संकट नहीं है। हमारी सेना का भेद जान लेने से भी हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हमारा बल तो कम होगा नहीं। दुनिया में जितने भी राक्षस हैं, उन सब को अकेले लक्ष्मण ही क्षणभर में खत्म कर सकते हैं। हमें विभीषण से डरना नहीं चाहिए। उससे बात करनी चाहिए।

प्रसंग की सीख
इस प्रसंग में यही बताया गया है कि व्यक्ति को अपनी शक्ति पर पूरा भरोसा होना चाहिए। इसी भरोसे के बल हमारी जीत की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं।

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