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जयंती विशेष/ महिष्मती के राजा थे कार्तवीर्य अर्जुन, भगवान दत्तात्रेय को प्रसन्न कर मांग ली 1 हजार भुजाएं

Dainik Bhaskar | Nov 13, 2018, 05:30 PM IST

रिलिजन डेस्क. 14 नवंबर, बुधवार को राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन की जयंती है। वाल्मीकि रामायण में इनका वर्णन मिलता है। उसके अनुसार, प्राचीन काल में महिष्मती (वर्तमान महेश्वर) नगर के राजा कार्तवीर्य अर्जुन थे। उन्होंने भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय को प्रसन्न कर वरदान में उनसे 1 हजार भुजाएं मांग ली। इससे उसका नाम सहस्त्रबाहु अर्जुन हो गया।

जानें सहस्त्रबाहू अर्जुन से जुड़ी खास बातें

  1. रावण को भी हराया था सहस्त्रबाहु ने

    एक बार रावण सहस्त्रबाहु अर्जुन को जीतने की इच्छा से उनके नगर गया। नर्मदा की जलधारा देखकर रावण ने वहां भगवान शिव का पूजन करने का विचार किया।

     

    जिस स्थान पर रावण पूजा कर रहा था, वहां से थोड़ी दूर सहस्त्रबाहु अर्जुन अपनी पत्नियों के साथ जलक्रीड़ा में मग्न था। अर्जुन ने खेल ही खेल में अपनी हजार भुजाओं से नर्मदा का प्रवाह रोक दिया।  जब रावण ने ये देखा तो उसने अपने सैनिकों को इसका कारण जानने के लिए भेजा। सैनिकों ने रावण को पूरी बात बता दी। रावण ने सहस्त्रबाहु अर्जुन को युद्ध के लिए ललकारा।  नर्मदा के तट पर ही रावण और सहस्त्रबाहु अर्जुन में भयंकर युद्ध हुआ। अंत में सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को बंदी बना लिया।  जब यह बात रावण के पितामह (दादा) पुलस्त्य मुनि को पता चली तो वे सहस्त्रबाहु अर्जुन से रावण को छोडऩे के लिए निवेदन किया। सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को छोड़ दिया और उससे मित्रता कर ली।
     

  2. सहस्त्रबाहु अर्जुन ने की थी ये गलती

    महाभारत के अनुसार, एक बार सहस्त्रबाहु अर्जुन अपनी सेना सहित जंगल से गुजर रहा था। उस जंगल में ऋषि जमदग्नि का आश्रम था।

     

    सहस्त्रबाहु ऋषि जमदग्नि के आश्रम में थोड़ी देर आराम करने के लिए इच्छा से रूक गया। ऋषि जमदग्नि के पास कामधेनु गाय थी, जो सभी इच्छाएं पूरी करती थी। उसकी  सहायता से ऋषि जमदग्नि ने सहस्त्रबाहु और उसके सैनिकों का राजसी स्वागत किया। कामधेनु का चमत्कार देखकर सहस्त्रबाहु बलपूर्वक उसे अपने साथ ले गया।  उस समय आश्रम में ऋषि जमदग्नि के पुत्र परशुराम नहीं थे। परशुराम जब आश्रम में आए, तो उन्हें सहस्त्रबाहु अर्जुन के अत्याचार के बारे में पता चला।  यह सुनकरपरशुराम क्रोधित हो उठे। वे कंधे पर अपना परशु रखकर माहिष्मती की ओर चल पड़े।

  3. परशुराम ने किया था सहस्त्रबाहु अर्जुन का वध

    सहस्त्रबाहु अभी माहिष्मती के मार्ग में ही था, कि परशुराम उसके पास जा पहुंचे। सहस्त्रबाहु ने जब यह देखा के परशुराम उनसे युद्ध करने आ रहे हैं तो उसने उनका सामना करने के लिए अपनी सेनाएं खड़ी कर दीं।

     

    परशुराम ने अकेले ही सहस्त्रबाहु की पूरी सेना का सफाया कर दिया। अंत में स्वयं सहस्त्रबाहु परशुराम से युद्ध करने के लिए आया। परशुराम ने उसके हजार भुजाओं को अपने फरसे से काट डाला और सहस्त्रबाहु अर्जुन का वध कर दिया।  इस घटना का प्रतिशोध लेने के लिए सहस्त्रबाहु अर्जुन के पुत्रों ने बाद में ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया। अपने निर्दोष पिता की हत्या से क्रोधित होकर परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहिन कर दिया था।