उज्जैन / काल भैरव प्रतिमा के मुख पर लगाते हैं मदिरा से भरा बर्तन, देखते ही देखते हो जाता है खाली

  • मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, काल भैरव के दर्शन करने और पूजा करने की विशेष तिथि

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2019, 06:13 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। मंगलवार, 19 नवंबर को काल भैरव अष्टमी है। इस दिन काल भैरव भगवान की विशेष पूजा की जाती है। पूजा में भैरव महाराज को कई तरह की चीजें चढ़ाई जाती हैं। कुछ जगहों पर मदिरा का भोग भी लगाया जाता है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में भगवान काल भैरव का मंदिर इसी वजह से प्रसिद्ध है। यहां स्थित काल भैरव प्रतिमा को मदिरा का सेवन कराया जाता है। प्रतिमा को शराब पीते हुए देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हर साल मार्गशीर्ष मास (अगहन) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (कालभैरव अष्टमी) को भगवान कालभैरव की सवारी निकाली जाती है। पुराणों में जिन अष्टभैरव का वर्णन है, उनमें से ये प्रमुख हैं। जानिए मंदिर से जुड़ी खास बातें...

उज्जैन स्थित काल भैरव मंदिर का उल्लेख स्कंदपुराण के अवंति खंड में भी मिलता है। यहां काल भैरव के वैष्णव स्वरूप का पूजन किया जाता है। मंदिर से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि उज्जैन के राजा भगवान महाकाल ने ही कालभैरव को इस स्थान पर क्षेत्र की रक्षा के लिए नियुक्त किया है। इसलिए कालभैरव को शहर का कोतवाल भी कहते हैं।

  • शिप्रा किनारे स्थित है मंदिर

काल भैरव का ये मंदिर शिप्रा नदी के किनारे भैरवगढ़ में स्थित है। चांदी की प्लेट में काल भैरव की प्रतिमा को मदिरा का भोग लगाया जाता है। प्लेट में शराब भरकर प्रतिमा के मुख पर लगाई जाती है। इसके बाद देखते ही देखते बर्तन से शराब खत्म हो जाती है। ये शराब कहां जाती है, आज भी ये रहस्य बना हुआ है।

  • बहुत प्राचीन है मंदिर का इतिहास

मंदिर एक ऊंचे टीले पर बना हुआ है, जिसके चारों ओर दीवार है। मंदिर की इमारत का जीर्णोद्धार करीब एक हजार साल पहले परमार कालीन राजाओं ने करवाया था। इस निर्माण कार्य के मंदिर की पुरानी सामग्रियों का ही इस्तेमाल किया गया था। मंदिर बड़े-बड़े पत्थरों को जोड़कर बनाया गया था। यह मंदिर आज भी मजबूत स्थिति में है।

  • कैसे पहुंच सकते हैं उज्जैन?

भोपाल-अहमदाबाद रेलवे लाइन पर स्थित उज्जैन एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां लगभग हर ट्रेन का स्टापेज है। मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यवसायिक शहर इंदौर से उज्जैन करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित है। सभी बड़े शहरों से इंदौर आसानी से पहुंचा सकता है। इंदौर से उज्जैन के लिए रेल, बस या निजी वाहन मिल जाते हैं।

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