- पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने की और इस तिथि पर पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा
Dainik Bhaskar
Jan 07, 2020, 03:38 PM IST
जीवन मंत्र डेस्क. शुक्रवार, 10 जनवरी को पौष मास की अंतिम तिथि पूर्णिमा है। इस दिन मांद्य चंद्र ग्रहण भी होगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस ग्रहण का सूतक नहीं रहता है और इसका धार्मिक महत्व भी नहीं है। इस वजह से शुक्रवार और पूर्णिमा के योग में पूरे दिन पूजा-पाठ किया जा सकेगा। पौष मास की पूर्णिमा से माघ मास के स्नान भी शुरू हो जाते हैं। माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। जानिए शुक्रवार को कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं...
- हर माह पूर्णिमा तिथि पर भगवान सत्यनारायण की कथा करने का विशेष महत्व है। सत्यनारायण भगवान श्रीहरि का ही एक स्वरूप है। घर की सुख-समृद्धि के लिए इनकी विशेष पूजा पूर्णिमा पर की जाती है। आप स्वयं कथा का पाठ कर सकते हैं या किसी ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं। ऐसा करने से घर की पवित्रता और सकारात्मकता बनी रहती है।
- शनिवार, 11 जनवरी से माघ मास शुरू हो जाएगा। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा प्रचलित है। शुक्रवार को पौष माह की पूर्णिमा से माघ मास के स्नान शुरू हो जाएंगे। पवित्र नदियों में स्नान कर जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए। इस समय ऊनी वस्त्रों का दान भी कर सकते हैं।
- शुक्रवार और पूर्णिमा के योग में देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का पूजन करें। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से भगवान का अभिषेक करें। इसके लिए केसर मिश्रित दूध का उपयोग करना चाहिए।
- पूर्णिमा पर बाल गोपाल की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा में माखन-मिश्री का भोग लगाएं। भोग में तुलसी के पत्ते भी अवश्य रखें।
- श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास समय पर्याप्त हो तो सुंदरकांड का पाठ करें। आप चाहें तो ऊँ ऐं हनुमते रामदूताय नमः मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।