पूजा-पाठ / शनि की पूजा में लोहे को बर्तनों का उपयोग करना चाहिए, शनि पूजन में तांबे के बर्तन रखने से बचें

शनिदेव को काले तिल और उड़द चढ़ाने की है परंपरा, इनकी पूजा में नीले फूल अर्पित करना चाहिए

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2020, 12:22 PM IST
जीवन मंत्र डेस्क. कुछ ही दिनों के बाद 23 और 24 जनवरी की बीच की रात में शनि राशि बदल रहा है। ये ग्रह धनु से मकर राशि में प्रवेश करेगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनि के राशि परिवर्तन से कुंभ राशि पर साढ़ेसाती शुरू होगी और वृश्चिक से उतर जाएगी। वृष-कन्या राशि का ढय्या खत्म होगा और मिथुन-तुला राशि पर शनि का ढय्या शुरू हो जाएगा। शनि की वजह से कुछ लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शनिदेव की कृपा पाने के लिए हर शनिवार को शनि पूजन करना चाहिए। यहां जानिए कुछ ऐसी बातें जो शनि पूजा करते समय ध्यान रखनी चाहिए...
  • शनिदेव की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि तांबा सूर्य की धातु है। शनि और सूर्य एक-दूसरे के शत्रु माने गए हैं। शनि की पूजा में लोहे के बर्तनों का ही उपयोग करना चाहिए। लोहे का या मिट्टी का दीपक जलाएं, लोहे के बर्तन में भरकर शनि को तेल चढ़ाएं।
  • लाल कपड़े, लाल फल या लाल फूल शनिदेव को नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि लाल रंग की ये चीजें मंगल ग्रह से संबंधित हैं। ये ग्रह भी शनि का शत्रु है। शनिदेव की पूजा में काले या नीले रंग की चीजों का उपयोग करना शुभ रहता है। शनि को नीले फूल चढ़ाना चाहिए।
  • शनिदेव पश्चिम दिशा के स्वामी माने गए हैं, इसलिए इनकी पूजा करते समय या शनि मंत्रों का जाप करते समय भक्त का मुख पश्चिक दिशा में ही होना चाहिए।
  • शनिदेव की प्रतिमा के ठीक सामने खड़े होकर दर्शन नहीं करना चाहिए। इस संबंध में मान्यता है कि ऐसा करने से शनि की दृष्टि सीधे भक्त पर पड़ती है।
  • अस्वच्छ अवस्था में शनि की पूजा नहीं करनी चाहिए। अस्वच्छ अवस्था यानी बिना नहाएं, झूठे मुंह या गंदे कपड़े पहनकर पूजा न करें।
  • शनिदेव को काले तिल और उड़द चढ़ाना चाहिए। ये दोनों चीजें शनिदेव को विशेष रूप से प्रिय मानी गई हैं। शनि के पूजन में इन बातों का ध्यान रखने से सकारात्मक फल मिल सकते हैं।
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