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मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर विराट ने कहा- 2014 में इंग्लैंड दौरे पर मुझे नहीं पता था कि क्या करूं

9 महीने पहले
इंदौर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विराट कोहली।
  • विराट ने 2014 में इंग्लैंड दौरे पर 5 टेस्ट में 13.50 की औसत से 134 रन बनाए थे
  • ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्सवेल ने हाल ही में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर क्रिकेट से ब्रेक लिया था
  • भारतीय कप्तान ने कहा- मैं भी अपने करियर में एक ऐसे ही दौर से गुजर चुका हूं, जहां मुझे लगने लगा था कि ये दुनिया का अंत है
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इंदौर. भारतीय कप्तान विराट कोहली का मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्लेन मैक्सवेल ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे को उठाकर बहुत अच्छा काम किया। मैक्सवेल की तारीफ करते हुए विराट ने अपने करियर के उस दौर को भी याद किया जब उन्हें इस तरह की चीजों का सामना करना पड़ा था। तब उन्हें लग रहा था कि अब कुछ नहीं बचा, यहां तक कि उन्हें ये भी नहीं पता था कि इन बातों को वे किसी के साथ कैसे शेयर करें। विराट के मुताबिक, ऐसी चीजें किसी भी व्यक्ति के साथ कभी भी हो सकती हैं। इसलिए इसे बेहद सकारात्मक तरीके से लिया जाना चाहिए।

2014 के इंग्लैंड दौरे पर मिली असफलता को याद करते हुए कहा भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘मैं भी अपने करियर में एक ऐसे ही दौर से गुजर चुका हूं, जहां मुझे लगने लगा था कि ये दुनिया का अंत है। मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि क्या करूं और किसी से क्या कहूं। कैसे बोलना है, कैसे बात करना है। उस वक्त मैं ये नहीं कह सकता था कि मानसिक रूप से बहुत अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूं और मुझे खेल से दूर होने की जरूरत है। आप नहीं जानते कि इस बात को किस तरह लिया जाएगा।’’ तब दौरे पर विराट 5 टेस्ट की 10 पारियों में 13.50 की औसत से कुल 134 रन ही बना सके थे।
 

‘मैक्सवेल ने क्रिकेटर्स के सामने आदर्श प्रस्तुत किया’
विराट ने कहा, ‘‘मैक्सवेल ने दुनियाभर के क्रिकेटरों के सामने एक सही उदाहरण प्रस्तुत किया है। अगर आप बिल्कुल सही मानसिक स्थिति में नहीं हैं तो आप कोशिश करते हैं, कोशिश और बस कोशिश करते हैं। इंसान होने के नाते किसी न किसी स्तर पर आप ऐसे पॉइंट पर पहुंच जाते हैं, जहां या तो आपका व्यवहार बदलने लगता है या आपको समय की आवश्यकता होती है।’’
 
विराट ने आगे कहा, ‘‘मैं ये नहीं कहना चाहता कि आपको हार मान लेना चाहिए, लेकिन अधिक स्पष्टता हासिल करने के लिए आपको थोड़ा और वक्त लेना चाहिए। मेरी नजर में ये बिल्कुल सही भी है। मुझे लगता है कि इन चीजों का सम्मान किया जाना चाहिए और इसे नकारात्मक तरीके से नहीं लिया जाना चाहिए।’’
 

‘गुलाबी गेंद के लिए अतिरिक्त एकाग्रता की जरूरत बताई’
कोहली ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि टेस्ट क्रिकेट में रोमांच लाने का ये नया तरीका है। मैंने कल (मंगलवार) गुलाबी गेंद से खेलकर देखा, मुझे लगा कि ये लाल गेंद के मुकाबले बहुत ज्यादा स्विंग होती है। ऐसे में जब आप लाल गेंद से खेल रहे हों, तभी अचानक गुलाबी गेंद का सामना करने के लिए आपको अतिरिक्त एकाग्रता की आवश्यता होगी।’’
 

‘मैक्सवेल ने क्रिकेट से ब्रेक लिया’
अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में मैक्सवेल ने क्रिकेट से कुछ समय के लिए ब्रेक लेने की घोषणा की थी। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को ऐसा करने की वजह बताया था। इस बारे एक प्रमुख क्रिकेट वेबसाइट ने साइकोलॉजिस्ट डॉ माइकल लॉयड के हवाले से लिखा था, ‘‘मैक्सवेल मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कुछ कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इस कारण वे क्रिकेट से कुछ दिन दूर रहेंगे।’’
 

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