रिपोर्ट / फेसबुक ने लोगों से ग्रुप में उनका हेल्थ डेटा शेयर करवाया, बाद में इसे लीक कर दिया

  • फेसबुक ने जानकारी लीक होने वाली बात को नकारा
  • FTC का उल्लंघन करने के लिए कई करोड़ों का फाइन लगाया

Dainik Bhaskar

Feb 20, 2019, 12:09 PM IST

गैजेट डेस्क.फेसबुक पर एक बार फिर से यूजर्स की प्राइवेसी के साथ समझौता करने का आरोप लगा है। इसको लेकर अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) में फेसबुक के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई है। फेसबुक पर इस बार लोगों का हेल्थ डेटा लीक करने का आरोप है। इसके लिए फेसबुक ने पहले लोगों से 'ग्रुप' (जिनका नाम मेडिकल केयर ग्रुप्स है) में जुड़कर वहां अपनी हेल्थ से जुड़ी जानकारियां साझा करने को कहा और उसके बाद इस डेटा को लीक कर दिया।

फेसबुक ने किया अधिनियमों का उल्लंघन

एफटीसी को दी गई शिकायत में साफ किया गया कि फेसबुक ने कई अनुरोधों को नजरअंदाज किया और सार्वजनिक रूप से उन लोगों की जानकारी साझा होने दी, जो केवल फेसबुक और यूजर्स के बीच होनी चाहिए थी। इतना ही नहीं फेसबुक ने सार्वजनिक रूप से इस बात को भी सिरे से नकार दिया कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की जानकारी लीक हो रही है। ये शिकायत सिक्योरिटी रिसर्चर और कुछ अन्य पीड़ित लोगों की तरफ से दायर की गई थी। इसमें ये भी कहा गया था कि फेसबुक इस बात को साफ करने में असमर्थ है कि जब एक यूजर ग्रुप ज्वाइन करता है तो उसे कौन-सी जानकारी दी जानी चाहिए। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक पर FTC का उल्लंघन करने के लिए कई करोड़ों का फाइन लगाया है।

क्या है फेसबुक मेडिकल केयर ग्रुप्स ?

फेसबुक खास तरह के मेडिकल केयर ग्रुप्स बनाता है। जिनमें कई पेशेंट्स और अन्य यूजर्स को जोड़ने के लिए कई तरह की भ्रामक बातें बताता है। जिनमें खासतौर पर प्राइवेसी को लेकर होती है। कई यूजर्स ने प्राइवेसी के चलते अपनी समस्याओं को लेकर कई निजी सवाल किए, कई तरह के पोस्ट और प्री ट्रीटमेंट फोटोज शेयर की, इतना ही नहीं कुछ ने तो अपनी मेडिकल रिपोर्ट्स तक इन ग्रुप्स पर शेयर कर डाली। इन सबके बीच फेसबुक लगातार इन ग्रुप्स से लोगों और जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता रहा। फेसबुक पर आरोप है की उसने स्वास्थ्य डाटा को लीक करने की अनुमति दी।

पहली बार जुलाई में सामने आया था हेल्थ डेटा लीक का मामला

हेल्थ डेटा लीक का मामला पहली बार जुलाई में सामने आया था जब एक खास तरह की जीन वाली महिलाओं के ग्रुप ( BRCA बीमारी से पीड़ित महिलाएं) को इस बात का अंदेशा हुआ कि उनके नाम और ईमेल एड्रेस बड़ी आसानी से डाउनलोड किए जा रहे हैं। डाउनलोडिंग का काम मेन्युल और क्रोम एक्सेंटशन के जरिए किया जा रहा है। तब फेसबुक ने इस ग्रुप में बदलाव कर इस तरह की जानकारी गुप्त रखने और महिलाओं की पहचान ऊजागर ना होने देने का दावा किया था। हालांकि, यह शिकायत इसलिए की गई थी कि लोग निजी हेल्थ डाटा को पब्लिकली पोस्ट कर रहे हैं। ये कानून के खिलाफ है और ऐसा होना फेसबुक की गोपनीयता कार्यान्वयन विधि के साथ एक गंभीर समस्या है।

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