CES 2020 / दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक शो में नई टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ज्यादा प्राइवेसी पर जोर

  • पर्सनल डेटा को लेकर जांच-पड़ताल और जागरूकता बढ़ने की वजह से टेक कंपनियों पर प्राइवेसी को लेकर दबाव बढ़ा
  • गूगल ने वाइस असिस्टेंट में प्राइवेसी पर बेहतर कंट्रोल के लिए दो नए कमांड जारी किए

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2020, 10:14 AM IST

लास वेगास. अमेरिका के लास वेगास में इस समय दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक शो-2020 (सीईएस) चल रहा है। सीईएस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सबसे ज्यादा धूम है। इससे तकनीक से संबंधित रोबोट से लेकर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट आकर्षण के केंद्र हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सीईएस-2020 में जो खास बात है, वह है कई बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा प्राइवेसी पर ज्यादा जोर देना। उपभोक्ताओं और रेगुलेटर्स द्वारा पर्सनल डेटा को लेकर जांच पड़ताल और जागरूकता की वजह से कंपनियों पर प्राइवेसी को लेकर दबाव बढ़ा है। लिहाजा इस शो में प्राइवेसी हॉट टॉपिक बनी हुई है।

गूगल ने मंगलवार को प्राइवेसी को लेकर नई घोषणा की। कंपनी ने अपने वॉइस असिस्टेंट के यूज में प्राइवेसी पर बेहतर कंट्रोल के लिए दो नए वॉइस कमांड की घोषणा की। उदाहरण के तौर अगर आपसे गूगल का वॉ00इस असिस्टेंट गलती से एक्टिवेट हो गया है तो आप उससे बोल सकते हैं कि 'हाय गूगल, अभी जो तुमने सुना उसे भूल जाओ। ये तुम्हारे लिए नहीं था।' आप गूगल से पूछ सकते हैं कि, 'हाय गूगल, क्या तुम मेरा ऑडियो डेटा सेव कर रहे हो'? साथ ही कंपनी ये भी आप्शन दे रही है कि आप गूगल को वाइस कमांड दे सकत हैं कि 'इस सप्ताह जो तुमने सुना उसे भूल जाओ।'

सोमवार को फेसबुक ने भी अपने प्राइवेसी चेकअप का नया वर्जन लॉन्च किया। फेसबुक द्वारा डेटा चोरी कर दूसरे कंपनियों को बेचने के मामले के बाद दुनिया भर में डेटा प्राइवेसी को लेकर बहस तेज हो गई है। शो में प्राइवेसी को लेकर 'ह्वाट डू कंज्यूमर वांट' नाम से शीर्ष कंपनियों के चीफ प्राइवेसी अफसरों की राउंड-टेबल मीटिंग हुई। इस राउंड-टेबल में एपल, फेसबुक, गूगल जैसी कई बड़ी कंपनियों के अधिकारी शामिल हुए। डेटा प्राइवेसी विवाद को लेकर फेसबुक पर 500 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाने वाले फेडरल ट्रेड कमीशन के कमिश्नर भी इस राउंड-टेबल में शामिल थे।

रिसर्च फर्म ई-मार्केटर की प्रिंसिपल एनालिस्ट विक्टोरिया पेट्रोक ने कहा कि अब कंज्यूमर ज्यादा जागरुक और सावधान हो गए हैं। लिहाजा टेक कंपनियां यह साबित करना चाहती हैं कि वह डेटा प्राइवेसी को गंभीरता से ले रही हैं। यह एक रक्षात्मक कदम है क्योंकि कंपनियों को पता है कि अगर वो ऐसा खुद नहीं करेगी तो हैवी रेगुलेशन का खतरा है। जो उनके लिए इससे बड़ी समस्या साबित होगी।

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