काम की बात / मोटर बीमा पॉलिसी सही है या फर्जी यह जांच करना बेहद जरूरी

  • नए नियमों के मुताबिक जहां दो-पहिया वाहन मालिकों को पांच साल के लिए थर्ड पार्टी पॉलिसी खरीदना जरूरी कर दिया गया है।
  • निजी कार मालिकों को तीन साल का थर्ड पार्टी बीमा खरीदने के अलावा ओन-डेमैज पॉलिसी भी लेनी होती है।

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2019, 04:12 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सभी कार मालिकों के लिए वाहन बीमा लेना अनिवार्य है। सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी के मद्देनजर सभी वाहनों के लिए कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस लेने का महत्व बढ़ा है। यह बात कमर्शियल वाहनों के अलावा उन पर भी लागू होती है जिन्हें किसी दुर्घटना में अपने ड्राइवर और थर्ड पार्टी की सुरक्षा के लिए मोटर इंश्योरेंस खरीदना होता है। उनकी इसी जरूरत के चलते फर्जी बीमा पॉलिसी बेचने के मामले बढ़े हैं।

प्रीमियम की स्लैब में बढ़ोतरी से बढ़ी फर्जी पॉलिसी की संभावनाएं

बीमा लेन-देन प्रक्रिया अक्सर तीसरे पक्ष के सर्विस प्रोवाइडर्स पर निर्भर होती है, जो बीमा कंपनियों और उसकी वैल्यू चेन को धोखाधड़ी के लिए अतिसंवेदनशील बना देता है। आम लोगों में बीमा को लेकर जागरूकता का अभाव और गलत धारणा भी उन्हें आसानी से धोखाधड़ी का शिकार बना देती है। 

नए नियमों के मुताबिक जहां दो-पहिया वाहन मालिकों को पांच साल के लिए थर्ड पार्टी पॉलिसी खरीदना जरूरी कर दिया गया है। निजी कार मालिकों को तीन साल का थर्ड पार्टी बीमा खरीदने के अलावा ओन-डेमैज पॉलिसी भी लेनी होती है।  वाहन बीमा के प्रीमियम की स्लैब में भारी बढ़ोतरी हुई है। इससे भी आम लोगों को फर्जी पॉलिसी बेचने की संभावनाएं बढ़ी हैं क्योंकि ऐसी पॉलिसियां असली पॉलिसी की प्रीमियम से काफी कम प्रीमियम पर बेची जाती है। देशभर में ऐसे धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं। दिल्ली, यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल के कुछ शहरों में बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गई हैं।

बीमा लेने लिए हमेशा इंश्योरेंस कंपनी से सीधे संपर्क करना चाहिए और पॉलिसी की जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। यह बीमा कंपनी को ईमेल लिखकर या उसके कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके या बीमा कंपनी की वेबसाइट पर पॉलिसी को वेरिफाई कर किया जा सकता है।

फर्जी पॉलिसी खरीदने से बचने के लिए नीचे दी गई 6 बातों का ध्यान रखना आवश्यक है..

चुकाए गए सभी प्रीमियम के लिए बीमा कंपनी से वैध रसीद मांगे। यह एक पुख्ता सबूत है।

अब बीमा पॉलिसी क्यूआर कोड के साथ आती हैं। ये क्यूआर कोड बीमा पॉलिसी की प्रामाणिकता को वेरिफाई करने में मदद करते हैं। यह काम स्मार्टफोन पर क्यूआर रीडिंग एप के जरिए क्यूआर कोड की इमेज को स्केन कर किया जा सकता है।

बीमा पॉलिसी पढ़ने और समझने के लिए कुछ समय लेना चाहिए। इससे न केवल क्रेडेंशियल्स की जांच करने, बल्कि पॉलिसी कवरेज विवरण को समझने के लिए भी जरूरी है।

यदि आप सीधे बीमा कंपनी या उसके द्वारा मान्यता प्राप्त प्रामाणिक इंटरमीडियरी से पॉलिसी खरीदते हैं तो नकली बीमा पॉलिसी खरीदने से भी बच सकते हैं।

बीमा लेने वाले को प्रीमियम का भुगतान ऑनलाइन या चेक या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से करना चाहिए। इससे प्रीमियम बीमा कंपनी के पास ही जमा होगा यह सुनिश्चित किया जा सकता है। पैसे के बड़े नुकसान और किसी दुर्घटना के बाद पॉलिसी के लाभ उठाने के लिए ऊपर दिए सुझावों का पालन आवश्यक है। ध्यान रखें बीमा लेने लिए आपने प्रीमियम पर जो रकम खर्च की है वह भविष्य में किसी दुर्घटना में बड़ा नुकसान होने पर बहुत मामूली जाएगी, कंपनी उस नुकसान की एक बड़े हिस्से की भरपाई कर देगी।

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