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एक्सपर्ट एडवाइस/ गिरावट के दौरान पैसे उधार लेकर न करें निवेश, एसआईपी में निवेश रखें चालू

Dainik Bhaskar | Dec 12, 2018, 12:26 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. जब निवेशक को लगता है कि शेयरों की वैल्यू सामान्य से ज्यादा तेजी से गिर रही है। उस समय वोलेटिलिटी इंडेक्स चढ़ने लगता है। इसे फियर इंडेक्स भी कहते हैं। इससे पता चलता है कि बाजार में कितना डर है। अगर हम अगस्त से निफ्टी और वोलेटिलिटी इंडेक्स देखें तो सितंबर के तीसरे हफ्ते में वोलेटिलिटी इंडेक्स ऊपर और निफ्टी नीचे जाने लगा। अस्थिरता की स्थिति में कौन सी 5 बातों से बचना चाहिए बता रहे हैं एंजेल ब्रोकिंग के फंड मैनेजर मयूरेश जोशी...Advertisement

एसआईपी में मिलता है अस्थिरता का फायदा

  1. शेयर बेचने में न करें जल्दबाजी

    अस्थिरता बाजार का हिस्सा होती है। मौजूदा हालात में अस्थिरता रुपए में कमजोरी और आईएलएंडएफएस संकट की वजह से आई। दोनों संकट अस्थायी हैं। यह 2008 जैसी स्थिति नहीं है जब लीमन संकट की चपेट में पूरी दुनिया का फाइनेंशियल सेक्टर आ गया था। जब आप जल्दबाजी में शेयर बेचते हैं तो उसकी लॉन्ग टर्म की क्षमता से महरूम रह जाते हैं। अस्थिरता हो तो मजबूत स्टॉक चुनने और कमजोर शेयर बेचने चाहिए। सारे शेयर नहीं बेचने चाहिए।

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  2. निचले स्तर पर आश्वस्त ना हों

    जो शेयर 3,000 रुपए में खरीदना चाहते थे वह 2,000 में मिले तो कोई भी निवेशक उसे लेना चाहेगा। लेकिन एक और बात ध्यान में रखनी चाहिए। जब बाजार में अस्थिरता हो और थोड़े समय में 10% गिरावट आ जाए तो वी-शेप यानी तेज रिकवरी नहीं होती, रिकवरी धीरे-धीरे आती है। बहुत से स्टॉक आपको आकर्षक दाम पर मिलेंगे लेकिन बाजार के निचले स्तर पर आने का इंतजार जरूर करें।

  3. एसआईपी के जरिए निवेश बंद ना करें

    इक्विटी फंड में हर महीने एसआईपी के जरिए निवेश कर रहे हैं तो अस्थिरता से चिंतित ना हों। एसआईपी में अस्थिरता का फायदा मिलता है। एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) बढ़ने पर यूनिट की वैल्यू बढ़ती है। एनएवी घटने पर निवेश के बदले आपको ज्यादा यूनिट मिलते हैं। अस्थिरता के बावजूद लंबे समय में इक्विटी एसआईपी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। एकमुश्त निवेश की तुलना में एसआईपी के जरिए इक्विटी फंड में निवेश पर हमेशा ज्यादा मिलता है।

  4. अस्थिरता उत्पन्न करने वाले सेक्टर से बचें

    अतीत में अस्थिरता पैदा करने वाले सेक्टर जैसे सीमेंट, टेक्नोलॉजी, रियल स्टेट को देखिए। इनकी वजह से रिकवरी कभी नहीं आई। ज्यादातर रियल एस्टेट स्टॉक 2007-08 की तुलना में बहुत कम भाव पर उपलब्ध हैं। अभी एनबीएफसी और मिडकैप कंपनियों के कारण आया। इनमें कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानक कमतर पाए गए। इनकी समस्याएं जल्दी सुलझने वाली नहीं लग रही हैं।

  5. उधार लेकर निवेश ना करें

    अस्थिर बाजार में लिवरेजिंग से बचना चाहिए। बाजार सस्ता लग रहा है सिर्फ इसलिए उधार लेकर निवेश नहीं करना चाहिए। आपको नुकसान भी हो सकता है। ज्यादा शार्ट ट्रेडिंग से भी बचना चाहिए क्योंकि अधिकतर मौकों पर आपको नुकसान झेलना पड़ सकता है। फ्यूचर्स में ज्यादा निवेश से बचें क्योंकि अस्थिर बाजार में फ्यूचर्स में नुकसान अधिक हो सकता है। 
    नोट: ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।