एक्सपर्ट एडवाइस / निवेशक को स्मार्ट नहीं अनुशासित होना जरूरी, मार्केट में तेज गिरावट के दौरान आराम से बैठें

Dainik Bhaskar

Dec 13, 2018, 10:57 AM IST

यूटिलिटी डेस्क. इक्विटी मार्केट में अस्थिरता का माहौल हमेशा आता रहता है। कई बार अस्थिरता इतनी ज्यादा होती है कि पुराने और बड़े निवेशकों का भरोसा भी डिगने लगता है। लेकिन समझदार निवेशक हड़बड़ी में शेयर बाजार से निकलने का नतीजा भी जानते हैं। वे इस तथ्य से वाकिफ होते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में अपनी शेयर होल्डिंग बेचने का मतलब है कि जब हालात बेहतर होंगे तब भी नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी। ये निवेशक इसीलिए समझदार हैं क्योंकि वे यह बात समझते हैं कि बाजार में गिरावट थोड़े समय के लिए है। देर-सबेर इक्विटी मार्केट फिर ऊपर जाएगा ही।

शार्ट टर्म की परेशानियों से न हों परेशान

  1. गिरते बाजार में आराम से बैठिए

    जब बाजार वोलेटाइल हो और उसमें तेज गिरावट आई हो, तो ऐसी स्थिति में आपको खुद से सवाल पूछना चाहिए कि क्या इससे आपकी आर्थिक स्थिति, आपके निवेश के लक्ष्य या आपके रिस्क प्रोफाइल पर इसका कोई असर पड़ा है? या फिर यह सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक दबाव है जिसकी वजह से आप अपनी होल्डिंग बेचना चाहते हैं? अगर आपके लांग टर्म के आर्थिक लक्ष्य नहीं बदले हैं और आपको पैसों की जरूरत नहीं है तो गिरावट के दौरान आराम से बैठे रहिए।

  2. लांग टर्म में ही पूरे होंगे आर्थिक लक्ष्य

    अगर आपने एकमुश्त निवेश कर रखा है तो बाजार में रिकवरी होने पर लांग टर्म में इक्विटी निवेश का फायदा आपको मिलेगा। अगर आप सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए निवेश करते हैं तो गिरते बाजार में आपको निवेश के बदले ज्यादा यूनिट्स मिलेंगे। इससे आपकी एवरेजिंग आपके पूरे पोर्टफोलियो की लागत कम हो जाएगी। परिस्थितियां चाहे जो हों, अगर आपका नजरिया लांग टर्म निवेश का है तभी आप के आर्थिक लक्ष्य का पूरा होना सुनिश्चित होगा।

  3. बार-बार के उतार-चढ़ाव से न हों परेशान

    इक्विटी मार्केट में बार-बार उतार-चढ़ाव का माहौल बनता रहता है। यह आपको परेशान करेगा। आप अपने पैसे की सुरक्षा को लेकर बेचैन भी होंगे। लेकिन अंततः यह फैसला आप ही को करना है कि शॉर्ट टर्म की परेशानियां आपके लक्ष्य को पाने में बाधा डाल पाती हैं या नहीं। इसीलिए कहा जाता है कि निवेश के बड़े फैसले आपके आर्थिक लक्ष्यों पर निर्भर करते हैं, बाजार की चाल पर नहीं।

  4. स्मार्ट होने के मुकाबले अनुशासित रहना ज्यादा जरूरी

    इतिहास पर गौर करें तो देखेंगे कि इक्विटी में निवेश के अच्छे फैसले गिरते बाजार में ही लिए गए हैं, चढ़ते बाजार में नहीं। जाने-माने इक्विटी इनवेस्टर वॉरेन बफेट ने भी कहा है कि आपका बाकी लोगों से ज्यादा स्मार्ट होना जरूरी नहीं। आपको दूसरों की तुलना में ज्यादा अनुशासित रहना है। इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो के बारे में कोई सवाल होने पर अपने आर्थिक सलाहकार से मशविरा कीजिए। वह आपके आर्थिक लक्ष्यों, आपकी आमदनी और रिस्क प्रोफाइल को देखते हुए पोर्टफोलियो में जरूरी बदलाव करेगा।
    नोट: ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।

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