पितृपक्ष / IRCTC करा रहा वाराणसी, बोधगया और गया की यात्रा, 3 दिन - 2 रात का रहेगा टूर पैकेज

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2019, 03:11 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. इस साल पितृपक्ष 13 सितंबर से शुरू हो गए है जो 8 सितंबर तक चलेंगे। यदि आप इस बार पितृपक्ष में पिंड दान के लिए गया जाने की योजना बना रहे हैं तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) आपके लिए आकर्षक पैकेज लेकर आया है। IRCTC ने Gaya Tarpan Package with Varanasi Darshan नाम के टूर पैकेज की शुरूआत की है। 3 दिन-2 रात के इस टूर पैकेज की शुरूआत वाराणसी से होगी। आप 20 सितंबर तक अपनी सुविधा के अनुसार टूर पैकेज ले सकते हैं।

टूर पैकेज से जुड़ी खास बातें...

  1. कहां- कहां घूमने का मिलेगा मौका?

    इस पैकेज के तहत वाराणसी, बोधगया और गया की यात्रा करायी जाएगी। जिसमें यात्रियों को गया में पिंडदान, बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में दर्शन, पूजा, बोधि वृक्ष के दर्शन, विष्णुपाद मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे।

    इतना ही नहीं पैकेज के तहत यात्रियों को वाराणसी के प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन भी कराए जाएंगे। यात्री यहां गंगा घाट दर्शन और गंगा आरती का आनंद भी उठा सकते हैं। 

  2. कैसा रहेगा शेड्यूल?

    पहले दिन आपको वाराणसी में गंगा स्नान करने का अवसर मिलेगा इसके बाद काशी विश्वनाथ, दुर्गा मंदिर, संकटमोचन मंदिर और तुलसी माता मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। शाम को गंगा आरती काराई जाएगी इसके बाद होटल में खाना व रुकना होगा।

    दूसरे दिन सुबह 6 बजे सड़क के रास्ते बोधगया के लिए रवाना होंगे। यहां आपको कई धार्मिक स्थलों के दशैन कराए जाएंगे। तीसरे दिन सुबह 6 बजे बोधगया से सड़क के रास्ते गया ले जाया जाएगा। यहां आप पिंड दान कर सकते हैं। इसी दिन रात में आपकी वाराणसी वापसी होगी। आपको बता दें कि टूर के दौरान भोजन और रुकने की व्यवस्था IRCTC की और से कराई जाएगी। 

  3. कितना देना होगा किराया?

    अगर आप सिंगल इस टूर पर जाते हैं तो आपको 22400 रुपए देने होंगे। वहीं डबल शेयरिंग में 12400 और ट्रिपल शेयरिंग में 9200 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क दूना होगा।

    आपके साथ अगर बच्चा है और आप उसके लिए अलग से बेड लेते हैं तो 7750 रुपए और अगर अलग से बेड नहीं लेते हैं तो 5100 रुपए देने होंगे।

  4. गया में पिंडदान से मिलती है मुक्ति

    हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितरों को पिंडदान करने से उन्हे मुक्ति मिलती है। वायु पुराण के मुताबिक जब गयासुर बद्रीनाथ से नारायण का कमलासन लेकर उड़ने लगा। तो नारायण ने आकाश में ही गयासुर के केश पकड़कर उसे रोक लिया जिस जगह पर भगवान ने गयासुर को रोका, वह गया कहलाया।

    इस दौरान नारायण ने गयासुर पर गदा से प्रहार भी किया था लेकिन गयासुर ने नारायण के कमलासन को आगे कर दिया। प्रहार से आसन का एक टुकड़ा बद्रीनाथ के पास गिरा। जो ब्रह्मकपाल के नाम से प्रसिद्ध है। तो वही दूसरा टुकड़ा हरिद्वार में गिरा जिसे नारायणीशिला के नाम से जाना जाता है और तीसरा हिस्सा जो गयासुर के पास रह गया था, उसे लेकर वो गया चला आया था। जहां भगवान विष्णु ने अपने चरणों से उसे धरती में घुसा दिया। जिसके बाद गयासुर ने खुद नारायण से मुक्ति की प्रार्थना की। जिसके बाद भगवान विष्णु ने न सिर्फ उसे मुक्ति दी बल्कि ये भी कहा कि जिन तीन जगहों पर उनका कमलासन गिरा है, वहां पूजा करने से मोक्ष मिलेगा। तभी से ये तीनों स्थल पिंडदान और पितृों के तर्पण के लिए सबसे खास हो गए हैं।

  5. कैसे करें बुकिंग?

    आप रिजर्वेशन काउंटर से इस टूर पैकेज की बुकिंग करा सकते हैं।

    टूर पैकेज से जुड़ी अधिक जानकरी या इसे ऑनलाइन बुक करने के लिए यहां क्लिक करें अन्य टूर पैकेजों की जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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