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इलाहाबाद/ हाईकोर्ट ने स्मारक घोटाले की तलब की स्टेटस रिपोर्ट, कहा-दोषी कितना भी रसूखदार हो बचना नहीं चाहिए

कोर्ट ने राज्यसरकार को लताड़ते हुए विजिलेंस की धीमी रफ़्तार पर सवाल उठायें हैं और कहा क्यों न मामले की जांच सीबीआई या एसआईटी को सौंप दी जाए।

  • लोकायुक्त जांच में पता चला कि पत्थर तराशने और उसे ढोने में सबसे ज्यादा घोटाला हुआ
  • इस मामले में पहला मुकदमा 1 जनवरी 2014 को दर्ज हुआ था

Dainik Bhaskar

Sep 21, 2018, 10:44 AM IST

इलाहाबाद. गुरूवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मायावती सरकार में नोएडा व लखनऊ में हुए स्मारक घोटाले में चल रही विजलेंस जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने एक हफ्ते के अन्दर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यही नहीं राज्य सरकार को लताड़ते हुए विजिलेंस की धीमी रफ़्तार पर सवाल उठाए हैं और कहा क्यों न मामले की जांच सीबीआई या एसआईटी को सौंप दी जाए। यही नहीं कोर्ट ने कहा कि दोषी कितना भी रसूखदार क्यों न हो लेकिन बचना नहीं चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होनी है। 

 

14 अरब रूपए का है घोटाला: तत्कालीनAdvertisement लोकायुक्त की जांच में स्मारक घोटाला 14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार रूपए का निकला था। ताम मायावती शासन में 2007 से 2012 के बेच नोएडा और लखनऊ में महापुरुषों के नाम पर कई स्मारकों का निर्माण करवाया गया था। 

 

मायावती की बढ़ सकती है मुश्किल: इस मामले में  मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा के साथ ही कई विधायक और तमाम विभागों के बड़े अफसर भी आरोपित हैं। मामले में पहला मुकदमा 1 जनवरी 2014 को गोमतीनगर थाने में दर्ज किया गया था। माना जा रहा है कि सख्ती हुई तो मायावती की मुश्किलें भी बढ़ेंगी। 

 

मामले में लीपापोती की जा रही है: इस मामले में याची भावेश पाण्डेय ने कहा है कि पिछले 4 साल से जांच की रफ़्तार काफी धीमी है। मामला हाईप्रोफाइल और राजनैतिक है इसलिए मामले में लीपापोती की जा रही है। याचिकाकर्ता ने मामले की जांच एसआईटी याAdvertisement सीबीआई से कराने की मांग भी की है।   

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