कानपुर / हॉस्पिटल चलाता है भाजपा प्रवक्ता पर जूता मारने वाला शक्ति भार्गव; मां ने दर्ज कराया था प्रताड़ना का केस

पत्नी के साथ डॉक्टर शक्ति भार्गव।

  • मां दया भार्गव ने बेटे शक्ति भार्गव व बहू शिखा पर दर्ज कराया था प्रताड़ना का केस
  • पिछले साल आयकर विभाग ने शक्ति के ठिकानों पर मारा था छापा

Dainik Bhaskar

Apr 18, 2019, 03:20 PM IST

कानपुर. भाजपा प्रवक्ता व राज्यसभा सांसद जीवीएल नरसिम्हा राव पर दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जूता उछालने वालाशक्ति भार्गव पेशे से डॉक्टर है। लेकिन, उनका मुख्य व्यवसाय जमीनों की खरीद से जुड़ा हुआ है।वाेकानपुर का रहने वालाहै। यहां सिविल लाइंस इलाके में भार्गव नाम से उनकाहॉस्पिटल है।

शक्ति भार्गव ने अपने फेसबुक पर एक पोस्ट में दावा कियाकि उसने सरकारी कंपनी 'द ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड' की बिक्री में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। भार्गव ने लिखा है कि इस मुहिम के बाद पिछले साल नवंबर में उसके घर पर इनकम टैक्स विभाग ने रेड किया।

मां औरभाईयों से चल रहा प्रॉपर्टी विवाद
भार्गव का मां दया भार्गव और भाइयों से प्रापर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। इसलिए वे पत्नी डॉ. शिखा भार्गव के साथ अलग रहते हैं। मां दया भार्गव ने बहू और बेटे पर प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था। प्रापर्टी विवाद और परिवारिक विवाद की वजह से वो मानसिक रूप से परेशान चल रहाथा। शक्ति की पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।

खुद को व्हिसल ब्लोअर मानताहैशक्ति

शक्ति भार्गव खुद को व्हिसल ब्लोअर मानताहै। 16 अप्रैल को फेसबुक पोस्ट में डॉ. भार्गव नेलिखा है कि-पिछले तीन सालों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) के 14 कर्मचारियों ने आत्महत्या की। नमो मे 2014 में कहा- ना खाऊंगा ना खाने दूंगा।

लाल इमली के कर्मचारियों की उठाई आवाज
भार्गव नेलिखा है, एक तरफ लाल इमली मिल्स के दर्जनों कर्मचारी आत्महत्या को मजबूर हैं। वहीं, दूसरी तरफ 11 संपत्तियां जिनकी कीमत 450 करोड़ रुपए हैं, उनके सौदे को साल 2008 में रद्द कर दिया गया। उसे समझौता धारकों ने 11 करोड़ रुपए में ब्रिटिश इंडिया कंपनी के पास बंधक बनाकर रखा हुआ है।

बीएसएफ के बर्खास्तजवान तेज बहादुर का जिक्र
पोस्ट में भार्गव ने बीएसएफ के बर्खास्तजवान और वर्तमान में पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी लोकसभा सीट से ताल ठोंक रहे तेज बहादुर यादव का जिक्र भीकिया। यादव ने 2017 में एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने खराब खाने की शिकायत की थी। तथ्यों को सामने लाने कोलेकर उनकेसाहस की प्रशंसा की जानी चाहिए थी। उन्होंने जवानों को मिलने वाले खाने में हो रहे भ्रष्टाचार को उठाया। बजाए इसके अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें निकाल दिया गया।

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