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केशव मौर्य ने सीएम योगी को भेजी एलडीए में हुए घोटालों की सूची, अधिकारियों से जवाब तलब

9 महीने पहले
  • कामर्शियल प्लांटों के आवंटन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का आरोप
  • केशव ने सीएम से सभी मामलों की जांच कराने का किया अनुरोध
  • यूपीपीसीएल घोटाला और होमगार्ड की ड्यूटी में फर्जीवाड़े के बाद पहले ही सकते में है सरकार
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में यूपीपीसीएल पीएफ घोटाला और होमगार्ड की फर्जी हाजिरी में हुए फर्जीवाड़े के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में भी बड़ा घोटाला सामने आया है। लोक निर्माण मंत्री और सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर एलडीए में हुए घोटालों की जांच करने का अनुरोध किया है।
 
दरअसल, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ को पत्र लिखकर एलडीए में हुए घोटालों की सूची भेजी है। इनमें कमर्शल प्लॉटों के आवंटन से लेकर शान-ए-अवध को बेचे जाने, अपार्टमेंट के निर्माण में घपले, समायोजन में फर्जीवाड़े, पुरानी योजनाओं की गायब हुई फाइलें और रोहतास को फायदा पहुंचाए जाने जैसे मामले शामिल हैं।
 

घोटाले से जुड़े अधिकारियों से जवाब-तलब
मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव अमित सिंह की तरफ से आवास विभाग के प्रमुख सचिव को इस संबंध में 31 अगस्त को पत्र भेजा गया था। प्रमुख सचिव ने 7 नवंबर को कमिश्नर कार्यालय पत्र भेजकर सभी मामलों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। इसके बाद कमिश्नर कार्यालय की तरफ से 8 नवंबर को एलडीए उपाध्यक्ष से रिपोर्ट मांग ली गई। उप मुख्यमंत्री की तरफ से जिन घोटालों की सूची भेजी गई थी, उससे जुड़े सभी अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया है।
 

नई कम्पनियों को किया गया आवंटन 
नियम के मुताबिक, एलडीए के कमर्शियल प्लॉटों की नीलामी में तीन साल पुरानी कंपनी ही शामिल हो सकती है, लेकिन एलडीए अधिकारियों ने नौ दिन पहले बनी कंपनियों को भी प्लॉट आवंटित कर दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि ई नीलामी में महज नौ दिन पहले बनी कंपनियों को शामिल कैसे किया गया?
 

कम्पनियों को नहीं किया गया ब्लैकलिस्ट
पत्र में कहा गया है कि पारिजात, पंचशील, स्मृति, सृष्टि और सहज अपार्टमेंट बनाने में धांधली करने वाली कंपनियों को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया, बल्कि बचा हआ काम दूसरी कंपनियों से करवा लिया गया।
 

चहेतों को मिले बड़े प्लॉट
पुरानी योजनाओं में चहेतों को पहले 40 वर्गमीटर के प्लॉट आवंटित किए गए और बाद में उसकी जगह उन्हें गोमतीनगर विस्तार जैसी पॉश कॉलोनियों में 150 वर्गमीटर के प्लॉट दे दिए गए। टीपी नगर, गोमतीनगर और जानकीपुरम समेत कई योजनाओं में सैकड़ों आवंटियों की फाइलें ही गायब हैं। रजिस्टर में कोई ब्योरा तक नहीं दर्ज है।
 

यूपीपीसीएल घोटाले से सरकार की किरकिरी
इससे पहले भी योगी सरकार के ऊर्जा विभाग में कर्मचारियों के पीएफ में घोटाले की बात सामने आ चुकी है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के एक लाख से अधिक कर्मचारियों की सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ)और अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) के 2267.90 करोड़ रुपये दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में फंस गए हैं। कर्मचारियों और विपक्षी नेताओं ने यह मुद्दा उठाया तो सरकार ने शनिवार को कई कार्रवाइयां कीं। मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे।
 

होमगोर्डों ड्यूटी में फर्जीवाड़ा आया सामने
यूपीपीसीएल घोटाले के बाद उत्तर प्रदेश में होमगार्डों की फर्जी ड्यूटी दिखाकर उनका वेतन हड़पने का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। इस फर्जीवाड़े से सरकार सकते में है। होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान ने हालांकि यह कहा है कि पूरे प्रदेश में होमगार्ड के वेतन का ऑडिट करवाया जाएगा और फर्जीवाड़े की जांच डीआईजी होमगार्ड करेंगे। लेकिन आशंका जतायी जा रही है कि जांच के बाद प्रदेश में करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आ सकता है।
 

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