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शिवसेना सांसद संजय राउत की विहिप को नसीहत, बोले- भीड़ इकट्‌ठा करने से नहीं बनेगा राम मंदिर

4 वर्ष पहले
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  • शिवसेना प्रमुख के कार्यक्रम को लेकर अयोध्या में हैं सांसद संजय राउत
  • बोले- दशहरा रैली में हो चुकी थी शिवसेना के कार्यक्रम की घोषणा
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अयोध्या. शिवसेना के सांसद संजय राउत ने विश्व हिंदू परिषद द्वारा अयोध्या में 25 नवंबर को प्रस्तावित धर्मसभा पर आपत्ति जताई है। विहिप को नसीहत देते हुए संजय राउत ने कहा कि अयोध्या में लाखों-करोड़ों भीड़ जमा करने से राम मंदिर का निर्माण नहीं होगा। अगर भीड़ इकट्ठा करनी है तो दिल्ली में संसद व सुप्रीम कोर्ट के सामने भीड़ इकट्ठा करें। उन्होंने कहा, केंद्र व प्रदेश में भाजपा सरकार है, अब बहाना नहीं चलेगा। अयोध्या में राम मंदिर बनवाना पड़ेगा।

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संजय रावत ने सोमवार को अयोध्या में लक्ष्मण किलाधीश व अन्य संतों महंतो से मुलाकात की। साथ ही 25 नवंबर को प्रस्तावित शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के कार्यक्रम की जानकारी साझा की। 

 

धर्मसभा की घोषणा से पहले शिवसना से करनी चाहिए थी बात

 

संजय राउत ने कहा कि विहिप के संत सम्मेलन के पहले ही शिवसेना के कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा दशहरा रैली में हो चुकी थी। लेकिन उसी दिन विहिप ने संत सभा का ऐलान कर दिया। तारीख को लेकर शिवसेना से बात करनी चाहिए थी। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। 

 

विश्व हिंदू परिषद को नसीहत देते हुए संजय राउत ने कहा कि अयोध्या में लाखों-करोड़ों भीड़ जमा करने से राम मंदिर का निर्माण नहीं होगा। अगर भीड़ इकट्ठा करनी है तो दिल्ली में संसद व सुप्रीम कोर्ट के सामने भीड़ इकट्ठा करें। हम राम मंदिर के लिए कानून की बात करते हैं, भीड़ जमा करने की नहीं। 

 

संजय राउत ने कहा कि अब देश में प्रदेश में भाजपा की सरकार है। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। केंद्र सरकार, राम मंदिर पर कानून लाए और 2019 के चुनाव के पहले अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू करवा दे।

 

सभी सिविल सूट कोर्ट में होंगे खारिज

 

राम मंदिर निर्माण मामले के पक्षकार महंत धर्मदास के वकील व पूर्व जज वीरेंद्र चौबे ने कहा कि जिसके पक्ष में टाइटल सूट होगा, उसी के पक्ष में फैसला आएगा। उनका दावा है, सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के पक्ष में टाइटल सूट नहीं है। सभी सिविल सूट सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो जाएंगे। कहा कि, सुप्रीम कोर्ट को मामले की प्राथमिकता समझनी चाहिए। कोर्ट का दायित्व बनता है कि वह समय पर सुनवाई करे।कहा कि जरुरत पड़ी तो संसद का घेराव होगा। राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा। सुनवाई न होने पर न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग भी एक विकल्प है।  

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