वाराणसी / बर्थ डे सेलिब्रेशन को अरविंद ने बनाया एक मुहिम; 2000 से अधिक लोगों का जन्म्दिन सेलिब्रेट किया, लोगों के बीच खुशियां बांटना मकसद

बर्थ डे सेलिब्रेशन की मुहिम चलाने वाले अरिवंद मिश्रा

  • यूपी कालेज से बीएससी कर चुके हैं अरविंद, शिवसेना के टिकट पर 1993 में लड़ा था विधानसभा चुनाव
  • कहा- डिप्रेशन के शिकार लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है यह मुहिम

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2020, 06:24 AM IST

वाराणासी. जिले के कुसहा गांव के रहने वाले अरविंद मिश्रा बीएसएस की पढ़ाई कर चुके हैं। जब पढ़ाई में उनका मन नहीं लगा तोउन्होंने शिवसेना के टिकट पर विधानसभा चुनाव में भ्भी हाथ आजमाया। लेकिन राजनीति भी उन्हेंरास नहीं आयी। फिर दोस्तों की सलाह परउन्होंने लोगों के बर्थ डे में शामिल होकर छोटी छोटी खुशियां देने का फैसला किया। इस मुहिम में उनके कुछ दोस्तों ने भी उनका साथ दिया और सिलसिला ऐसा चला कि वह 'बर्थ डे सेलिब्रेशन' के नाम से मशहूर हो गए हैं। उनका दावा है कि वह पिछले दस सालों में 2000 से ज्यादे लोगों का बर्थ डे सेलिब्रेशन कर चुके हैं।

अरविंद मिश्रा बताते हैं कि इसके पीछे उनका मकसद व्यस्त लाइफ में लोगों में छोटी छोटी खुशियां बांटना है। इसके अलावा जो लोग डिप्रेशन का शिकार होते हैं, वो लोग बर्थ डे में शामिल होकर अच्छा महसूस करते हैं। लोगों से बातचीत करे।

मेडिकल फील्ड से जुड़े दोस्तों ने दिया आइडिया
अरविंद मिश्रा ने दैनिक भास्कर ऍप से बताया कि उनके कुछ दोस्त मेडिकल फील्ड से जुड़े हैं, उन्होंने ये बताया कि किसी के बर्थ डे को फेसबुक पर लाइव करने और फोटो शेयर करने से डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिलती है। लोगों को छोटी छोटी खुशियां समझ में आती हैं। पॉजिटिव सोच के साथ कई लोग ऐसा करने लगे हैं। लोग एक दूसरे के लिए समय निकालने लगे हैं और इसको उन्होंने समाज में एक मुहिम बना दिया।

कुछ साथी मुहिम में शामिल भी हुए

अरविंद मिश्रा ने बताया फेसबुक पर जिस साथी का भी बर्थडे शो करता है, उसके लिए केक वो खुद ले जाते हैं। फेसबुक पर ही सभी को आमंत्रित करते हैं। उनके कुछ साथी गोविंद यादव, ऋषि झिंगरन ,सुनील, टिंकू ये लोग कुछ पारंपरिक नाश्ता (कचौड़ी सब्जी,गाजर का हलवा) ये लोग भी लेकर आते हैं।


कहां कहां होता है बर्थ डे सेलिब्रेशन
गंगा घाट, बजड़ा, किसी के घर पर ही मनाया जाता है। टिंकू फ्री में सभी के लिए नाव देते हैं। इसका किराया तीन हजार किराया होता है। जिसका जो सहयोग वो खाने का लेकर आता है। सभी को फेसबुक, वाट्स एप से ही बुलाया जाता है।सुबह की चाय जिसके घर होता है। एक दिन पहले बता देते हैं। घर हो या किसी इलाके में चाय की दुकान एक दिन पहले ही सब तय हो जाता है।

यूपी कॉलेज से बीएससी तक पढ़ाई कर चुके हैं अरविंद
यूपी कालेज से बीएससी करने के बाद उन्होंने ज्ञानपुर से एमसी की पढ़ाई शुरू की लेकिन इसे बीच में ही छोड़ दिया।1993 में शिवसेना के टिकट से विधानसभा चुनाव लड़ा। लेकिन बाद में 2000 में कांग्रेस ज्वाईन कर लिया। युवा कांग्रेस के मंडल प्रमुख,महासचिव,प्रभारी भी रह चुके हैं। 2019 में भाजपा में शामिल हो गए थे। सोशल मीडिया पर स्वक्षता, सामाजिक मुद्दों पर मुहिम भी चलाते हैं।

दोस्त के जन्मदिन में शरीक होने पहुंचे अरविंद
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