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ट्रम्प ने अवैध ड्रग्स बनाने और तस्करी करने वाले 21 देशों की लिस्ट जारी की, भारत का नाम भी शामिल

DainikBhaskar.com | Sep 12, 2018, 10:19 AM IST

ट्रम्प ने कहा कि सरकार ने नशे की समस्या से निपटने के लिए 4 अरब डॉलर लगाए

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एशियाई देशों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और म्यांमार का नाम भी शामिल ट्रम्प ने अमेरिका में ड्रग्स पहुंचनेके पीछे मैक्सिको, कोलंबिया और अफगानिस्तान को जिम्मेदार बताया

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अवैध रूप से ड्रग्स बनाने और उनकी तस्करी करने वाले 21 देशों के नाम जारी किए हैं। इसमें भारत का नाम भी शामिल है। इसके अलावा अफगानिस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार लिस्ट में शामिल दूसरे एशियाई देश हैं। इस मौके पर ट्रम्प ने कहा कि किसी देश का लिस्ट में शामिल होना उसकी सरकार के नशीले पदार्थों की रोकथाम के प्रयासों को नहीं दर्शाता। हो सकता है कि कई देश नशे का कारोबार रोकने के लिए ठोस मेहनत कर रहे हों, लेकिन उनकी भौगोलिक, वाणिज्यिक और आर्थिक स्थितियों की वजह से ड्रग्स का उत्पादन और तस्करी लगातार जारी हो।

लिस्ट में एशियाई देशों के अलावा बहामास, बेलिज, बोलिविया, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, जमैका, लाओस, मैक्सिको, निकारगुआ, पनामा, पेरू और वेनेजुएला के नाम भी शामिल हैं।

अमेरिका में ड्रग्स से हर साल हजारों मौतेंं:ट्रम्प ने कहा कि वेनेजुएला और बोलिविया जैसे देश पिछले 12 महीनों में इंटरनेशनल काउंटर-नार्कोटिक समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में नाकाम रहे। अफगानिस्तान, मैक्सिको और कोलंबिया में भी अवैध ड्रग्स की फसलें पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी हैं। इन देशों में ड्रग्स उत्पादन सीधे तौर पर अमेरिकी हितों को प्रभावित करते हैं। मैक्सिको में बनने वाली हेरोइन और कोलंबिया में बनने वाली कोकीन की वजह से अमेरिका में हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। अफगानिस्तान में पैदा होने वाली अफीम की वजह से वहां भ्रष्टाचार बढ़ता है और तालिबान इससे कमाई करता है। आतंकियों की वजह से ही अफगानिस्तान की सुरक्षा प्रभावित होती है, जिसमें हजारों अमेरिकी सैनिक जुटे हैं।

ओपाइड ड्रग से जूझ रहा है अमेरिका:अमेरिका में इस वक्त हजारों युवा ओपाइड नाम के एक ड्रग की वजह से नशे का शिकार हो रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि ओपाइड समस्या से निपटना उनके प्रशासन की तत्काल प्राथमिकताओं में से एक है। सरकार देश में नशे की रोकथाम के लिए 4 अरब डॉलर (करीब 29 हजार करोड़ रुपए) लगा रही है। अंतरराष्ट्रीय पर भी अमेरिका बाकी देशों की नशे के कारोबार से लड़ने मदद करता रहेगा।