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नस्लीय भेदभाव को दर्शाती 15 तस्वीरें, अश्वेतों का कर रखा था जीना मुहाल

8 वर्ष पहले
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जोहानसबर्ग। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद विरोधी आंदोलन के पुरोधा और पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का कल निधन हो गया। वह 95 साल के थे। मंडेला पिछले कुछ महीनों से फेफड़ों में संक्रमण के शिकार थे और जोहांनसबर्ग स्थित अपने घर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने मंडेला के निधन की जानकारी दी। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद विरोधी आंदोलन के दौरान वह लगभग तीन दशकों तक जेल में बंद रहे थे। वह अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। राष्ट्र के नाम अपने शोक संदेश में राष्ट्रपति जैकब जुमा ने देशवासियों से कहा कि दक्षिण अफ्रीका के लोकतंत्र के संरक्षक और हमारे प्यारे नेल्सन मंडेला अब हमारे बीच नहीं रहे।
मंडेला के अंहिसावादी रवैये और गांधीवादी तौर तरीकों के कारण उन्हें अफ्रीकी गांधी कहा जाता है। वर्ष 1993 में उनके इसी तेवर को सम्मान देते हुये उन्हें नोबेल के शांति पुरस्कार से नवाजा गया। दक्षिण अफ्रीका की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली पार्टी अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के वह अध्यक्ष भी रहे है और 1994 से 1999 के दौरान उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की बागडोर भी संभाली थी।
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति के निधन के बाद देश में राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर दी गई है और राष्ट्रध्वज को आधा झुका दिया गया है। राष्ट्रपति जैकब जुमा ने अपने शोक संदेश में कहा कि मंडेला का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ्रीका के केप प्रांत में हुआ था। 1999 में सक्रिय राजनीति से लगभग दूर रहने के बाद वह अपना ज्यादातर समय सामाजिक कार्यो में लगाते थे।
मंडेला जीवनभर रंगभेद विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ते रहे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों को उनके अधिकार दिलाए। यह मंडेला के प्रयासों का परिणाम है कि आज दुनिया से नस्लीय भेदभाव पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है।
आगे की स्लाइड्स में दी गई ऐतिहासिक तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि समूचे विश्व में कैसे नस्लीय भेदभाद किया जाता था।