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ओशो की मौत के 23 साल बाद सामने आई यह 'वसीयत' मचा सकती है हंगामा!

8 वर्ष पहले
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पुणे। कुछ दिन पहले धर्मगुरु ओशो की मृत्‍यु के 23 साल बाद उनकी वसीयत सामने आई थी। ओशो की 1000 करोड़ से भी ज्‍यादा की संपत्ति पर हक जताने वाले लोग कोई और नहीं बल्कि उनके भक्‍त ही हैं। अब ट्रस्‍ट के ही दो गुट आमने-सामने आ गये हैं और मामला पुणे कोर्ट तक पहुंच गया था। भगवान रजनीश की 19 जनवरी 1990 को मृत्‍यु हो गई थी और उस वक्‍त किसी भी ट्रस्‍टी ने वसीयत के बारे में जिक्र नहीं किया था, लेकिन 23 साल बाद अचानक से यूरोपियन यूनियन कोर्ट के सामने ओशो की वसीयत रखी गई थी।
इस वसीहत ने ओशो की संपत्ति के मालिकाना हक की लड़ाई को नया मोड़ दे दिया था। ओशो के इस संपत्ति में उनका पुणे के कोरेगांव पार्क इलाके में बना 10 एकड़ में फैला विशाल आश्रम और उनके प्रवचनों के प्रकाशन से हो रही करोड़ों की आय शामिल है। ओशो की इस वसीयत के सामने आने के बाद उनके समर्थकों ने इसे एक फर्जी वसीयत बताते हुए इसके खिलाफ पुणे के कोरेगांव पार्क पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया है।
आगे की स्लाइड में देखिए ओशो की पूरी वसीयत ...