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गुजरात: 600 मीटर चौड़ी नदी पार करते हैं, फिर 5 Km पैदल चलकर स्‍कूल पहुंचते हैं बच्‍चे

7 वर्ष पहले
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फोटो: पीतल के बर्तन की मदद से हीरन नदी को पार करते स्‍कूली बच्‍चे।
वडोदरा। गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के 16 आदिवासी गांवों के करीब 125 लड़के-लड़कियां रोजाना जान पर खेलकर स्‍कूल जाते हैं। ये बच्‍चे सुबह सात बजे करीब 600 मीटर चौड़ी हीरन नदी को पार करते हैं और गीले होकर स्‍कूल पहुंचते हैं। नदी पार करने के लिए पीतल के एक बड़े बर्तन का सहारा लिया जाता है जिसे स्‍थानीय भाषा में 'गोहरी' कहा जाता है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस के मुताबिक, प्रशासन की लापरवाही की वजह से बच्‍चों को यह खतरनाक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ता है। पिछले सात साल से नदी पर पुल बनाने का वादा किया जा रहा है, लेकिन अभी तक इसे पूरा नहीं किया गया है।
स्‍कूल जाने के लिए जान की बाजी
नौंवी क्‍लास में पढ़ने वाली गीता भी अपने दोस्‍तों के साथ नदी पार करने के लिए रोजाना सुबह सात बजे पहुंच जाती हैं। इस दौरान इन लड़कियों में से एक के पिता सुरक्षा के लिहाज से उनके साथ तैरकर नदी पार करते हैं। कई मौकों पर कुछ ग्रामीण नदी के दोनों तरफ खड़े रहते हैं। नदी में पानी की मात्रा बढ़ने या फिर पानी में कोई खतरनाक चीज नजर आने की सूरत में वे बच्‍चों को अलर्ट करते हैं। नदी पार करने में इन लोगों को 30 मिनट का वक्‍त लगता है। किताबों और स्‍कूल बैग को प्‍लास्टिक के एक बैग में लपेटकर रखा जाता है। चप्‍पल को गोहरी में डाल दिया जाता है ताकि वे सुरक्षित रहें।
नदी पार करने के बाद 5 किलोमीटर का पैदल रास्‍ता
नदी पार करने के बाद इन लड़कियों का चूड़ीदार-कुर्ता स्‍कूल ड्रेस भीग जाता है जिसे वे निचोड़कर सुखाने की कोशिश करती हैं। नदी पार करने के बाद ये लड़कियां सेवाड़ा गांव पहुंचती हैं। यहां से उतावाड़ी गांव स्थित अपने स्‍कूल उतावाड़ी प्राथमिक और उच्‍च प्राथमिक शाला की पांच किलोमीटर की दूरी वे पैदल तय करती हैं।
सरकार ने नहीं उठाया कदम
पिछले सात साल से इन गांवों के लोग नदी पर पुल बनाने की मांग पर अधिकारियों के पास आवेदन भेज रहे हैं, लेकिन इनकी मांग अभी तक अनसुनी है। सेवाड़ा गांव के सरपंच ने बताया कि ग्रामीणों ने मुख्‍यमंत्री आनंदीबेन पटेल के पास भी आवेदन भेजा है। उन्‍होंने कहा, 'अधिकारी हमसे लगातार कह रहे हैं कि पुल बनाने की योजना मंजूर हो गई है और जल्‍द ही काम शुरू हो जाएगा। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। हम सिर्फ लगातार आवेदन भेज रहे हैं और इसका जवाब भी नहीं दिया जा रहा है। हमें डर है कि कहीं किसी दिन कोई बच्‍चा नदी में डूब न जाए।'
छोटा उदयपुर के कलेक्‍टर जीनू देवन ने कहा, 'प्रस्तावित पुल को लेकर क्‍या प्रगति हुई है, हम इस पर नजर रख रहे हैं। अब यह मामला हमारे संज्ञान में है।'
आगे की स्‍लाइड्स में देखिए नदी पार करते बच्‍चों की तस्‍वीरें