8 वर्ष पहले
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नई दिल्‍ली। रैन बसेरों में ठंड से हुई मौत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। दिल्‍ली सरकार ने हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वह अलग-अलग समाजसेवी संस्‍थाओं (एनजीओ) से बात कर रही है। उधर, समाज सेवी संस्‍थाओं ने कोर्ट को बताया कि उन्‍होंने सरकार से बात करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्‍होंने बात करने से इनकार कर दिया। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने एनजीओ के जवाब पर दिल्ली सरकार के रवैये पर सवाल उठाए।

दिल्‍ली हाईकोर्ट की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि विभिन्न एजेंसियों से सरकार ने बातचीत नहीं की। बैठकों में सामाजिक संगठनों को नहीं बुलाया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने चार हफ्ते में इस मसले पर दिल्‍ली सरकार से रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले दिल्‍ली हाईकोर्ट ने सर्द रातों में राजधानी में हुई चार मौतों को गंभीर मानते हुए सरकार से पूछा है कि वह रैन बसेरों के लिए अपनी अल्पकालिक व दीर्घकालिक नीति बताए।

रैन बसेरों को लेकर क्‍या कहा गया था जनहित याचिका में

दिल्‍ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मांग की गई थी कि रैन बसेरों की संख्या मास्टर प्लान के अनुसार बनाई जाए और लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस पर दिल्‍ली हाईकोर्ट में दिल्‍ली सरकार की तरफ से बताया गया कि बसों का अधिग्रहण कर उनको अस्थाई तौर पर बेघर लोगों के लिए आश्रय स्थल बनाया गया है और रैन बसेरों में मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। इस पर अदालत ने सवाल किया था कि बसों में सोने का प्रबंध तो कर दिया गया है, लेकिन क्या अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध की गई हैं।