स्वयं जूते पॉलिश कर अनुशासन कायम किया जाकिर हुसैन ने

10 वर्ष पहले
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यह प्रसंग उस समय का है, जब पूर्व राष्ट्रपति और सुविख्यात शिक्षाविद् डॉ. जाकिर हुसैन जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति थे। जाकिर हुसैन बेहद ही अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे। वे चाहते थे कि जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र अत्यंत अनुशासित रहें, जिनमें साफ-सुथरे कपड़े और पॉलिश से चमकते जूते होना सर्वोपरि था। इसके लिए डॉ. जाकिर हुसैन ने एक लिखित आदेश भी निकाला, किंतु छात्रों ने उस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया। छात्र अपनी मनमर्जी से ही चलते थे, जिसके कारण जामिया विश्वविद्यालय का अनुशासन बिगड़ने लगा। यह देखकर डॉ. हुसैन ने छात्रों को अलग तरीके से सुधारने पर विचार किया। एक दिन वे विश्वविद्यालय के दरवाजे पर ब्रश और पॉलिश लेकर बैठ गए और हर आने-जाने वाले छात्र के जूते ब्रश करने लगे। यह देखकर सभी छात्र बहुत लज्जित हुए। उन्होंने अपनी भूल मानते हुए डॉ. हुसैन से क्षमा मांगी और अगले दिन से सभी छात्र साफ-सुथरे कपड़ों में और जूतों पर पॉलिश करके आने लगे। इस तरह विश्वविद्यालय में पुन: अनुशासन कायम हो गया। उक्त कथा का सार यह है कि किसी भी संस्था में अनुशासन लाने के लिए उसके मुखिया को स्वयं उदाहरण पेश करना पड़ता है। लोगों को जिस कार्य को करने हेतु प्रेरित किया जाना है, उस पर पहले स्वयं को अमल करना होगा, तभी वह प्रभावशाली होगा। जब हम स्वयं अनुशासित होंगे, तभी दूसरों को भी प्रेरित कर पाएंगे।