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कभी नीतीश ने जीतन राम मांझी को मंत्री पद का शपथ दिलाने के बाद हटा दिया

7 वर्ष पहले
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पटना. वर्ष 2005 की बात है जब नीतीश कुमार ने पहली बार सरकार बनायी थी। जिस व्यक्ति को नीतीश कुमार ने आज सीएम बनाया, उसी व्यक्ति को नीतीश कुमार ने मंत्री पद का शपथ दिलाने के कुछ घंटों के बाद ही अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया था। उन पर बीएड डिग्री घोटाले का आरोप था। बाद में जीतन राम मांझी इस आरोप से बरी हो गए थे। यह आरोप राजद सरकार में राज्य शिक्षा मंत्री होने के दौरान उन पर लगा था। इसमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री जयप्रकाश यादव भी फंसे थे।
बिहार के अगले मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का जीवन काफी दुखों भरा रहा है। गया जिले के एक मजदूर परिवार में छह अक्टूबर 1944 में जन्मे जीतन राम मांझी के पिता खेतिहर मजदूर थे। वे दूसरे के यहां मजदूरी का काम किया करते थे। जीतम राम मांझी ने स्कूली पढ़ाई किसी तरह पूरी की। इसके बाद हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए वे गया चले गये। मैट्रिक की परीक्षा उन्होंने सेकेंड डिवीजन से पास किया। गया कॉलेज, गया से 1966 में इतिहास से स्नातक की परीक्षा पास की। स्नातक की डिग्री लेने के बाद उन्होंने अपने परिवार को चलाने के लिए क्लर्क की नौकरी शुरू कर दी। 1980 में नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।

2005 के विधानसभा चुनाव में जीतन राम मांझी ने बाराचट्टी से चुनाव जीता था। उन्हें नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, पर फर्जी डिग्री घोटाला में नाम होने के कारण जीतन राम मांझी को शपथ ग्रहण के कुछ घंटे बाद ही अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया था। यह घोटाला लालू प्रसाद के शासनकाल में 1999 में सामने आया था। उस समय जीतन राम मांझी शिक्षा राज्य मंत्री थे। बाद में वे इस आरोप से बरी हो गये थे। 2010 में वे मखदुम पुर विधानसभा से चुनाव लड़ा और वर्तमान में अनूसुचित जाति, अनूसुचित जनजाति कल्याण के मंत्री पद पर कायम हैं।