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प्राइवेट परीक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी

10 वर्ष पहले
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बिलासपुर. प्राइवेट परीक्षा अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने तीन साल तक परीक्षा लेकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। अब प्राइवेट परीक्षा राज्य सरकार को ही कंडक्ट करानी होगी। मुख्यमंत्री रमन सिंह के नाम इस आशय का पत्र मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने भेजा है। इस चिट्ठी के बाद एक तरह से सेंट्रल यूनिवर्सिटी द्वारा प्राइवेट परीक्षा लेने की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। प्राइवेट परीक्षा मामले में 40 हजार परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। अब तक यह मामला उच्च शिक्षा विभाग और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बीच नियमों और दांव-पेंच में अटका रहा। सूत्र बताते हैं कि पत्र में सिब्बल ने साफ तौर पर कहा है कि गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के सेंट्रल यूनिवर्सिटी के तौर पर अपग्रेड होने के बाद हमने तीन वर्ष तक प्राइवेट परीक्षा ली। अब यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्राइवेट परीक्षा कंडक्ट कराए। उच्च शिक्षा विभाग लेगी परीक्षा: सिब्बल के इस पत्र के बाद प्राइवेट परीक्षा कराना उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मे आ गया है। राज्य सरकार अब तक इसी उम्मीद में थी कि किसी तरह मान-मनौव्वल कर मामले को सुलझा लिया जाएगा और सेंट्रल यूनिवर्सिटी इस साल भी प्राइवेट परीक्षा ले लेगी। मामला मानव संसाधन मंत्रालय पहुंचा। इस दौरान सिब्बल ने गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. लक्ष्मण चतुर्वेदी को दिल्ली भी बुलाया। कमजोर ढांचा बना वजह राज्य में उच्च शिक्षा विभाग की हालत कितनी दयनीय है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से संबद्ध 121 कॉलेजों में महज 505 रेगुलर व धारा 28 के शिक्षक हैं। रेगुलर नियुक्ति नहीं होने से रेगुलर व प्राइवेट परीक्षा में संविदा शिक्षक व क्लर्को तक की ड्यूटी परीक्षा में लगाई जाती है। परीक्षा केंद्रों की संख्या भी इस मामले में रोड़ा बनी। पिछली बार गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने 64 परीक्षा केंद्रों में रेगुलर व प्राइवेट परीक्षा ली थी। हर साल लगातार बढ़ रहे रेगुलर व प्राइवेट परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए परीक्षा केंद्र क्यों नहीं खुले? इसे ही आधार बनाकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने परीक्षा से पल्ला झाड़ा। सरकार के पास विकल्प कम, चुनौती बड़ी इस साल प्राइवेट परीक्षा होने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पिछले साल दिसंबर में निर्णय के बाद उच्च शिक्षा विभाग पूरे एक साल सोता रहा और जब समय आया तब भी मंत्री-अधिकारियों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई। इधर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने भी छात्रहित के आगे नियमों को सवरेपरि माना। प्राइवेट परीक्षा कराने के लिए राज्य सरकार के पास अब विकल्प बेहद सीमित हैं और चुनौती बड़ी है। सरगुजा यूनिवर्सिटी की खुद की स्थिति संसाधनों के अभाव में दयनीय है। रविशंकर यूनिवर्सिटी भी इस मामले से पहले ही किनारा कर चुकी है, बल्कि उन्होंने तो बिलासपुर क्षेत्र के प्राइवेट परीक्षार्थियों की घुसपैठ रोकने के लिए प्राइवेट फॉर्म जमा करने के दौरान मूल निवास प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया था।