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6 साल की उम्र में हुआ था चमत्कार, इसे सुन आप भी करेंगे जय-जयकार

9 वर्ष पहले
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रायपुर/धमतरी। श्रीमद भागवत कथा एवं रामकथा वाचन में कानुपर की बाल विदुषी स्तुति बहन(17) जाना पहचाना नाम है। श्रोता उनके मुख से धाराप्रवाह कथा सुन गद्गद होते हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम की स्तुति बहन ने दोनों ग्रंथों के कभी पन्ने भी नहीं पलटे। बस मौका मिला और धर्म ज्ञान के अविरल धारा में वह सिर्फ 6 साल की उम्र से कथा रसपान कराती आ रही है। इन दिनों शहर के सोरिद वार्ड में स्तुति बहन श्रीमद भागवत कथा का रसपान करा रही है।





बुधवार को दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि बचपन से उसे भजन आदि का शौक था। 6 वर्ष की उम्र में वह धार्मिक कथा सुना रही है, लेकिन अब तक उसने रामकथा और भागवत कथा का अध्ययन नहीं किया।दोनों कथाएं उसे गॉड गिफ्ट के रूप में मिली है। उन्होंने बताया कि मेरठ बागपत में कथा का आयोजन किया गया था, लेकिन कथा के शुभारंभ दिवस ही कथावाचक ने कथा सुनाने से मना कर दिया। तब कथा के आयोजकों ने उनके नाम का प्रचार कर दिया, क्योंकि लोग जानते थे कि वह भजन एवं कथा जानती है और भक्तों के आग्रह एवं परिवार के कहने पर कथा सुनाने राजी हुई। कथा सुनाने के ठीक एक दिन पहले उसे दुर्गा देवी ने दर्शन दिया। इस दर्शन के बाद बिना किताब के उन्होंने गद्दी पर बैठकर कथा सुनाई। यहीं से आध्यात्म का सफर शुरु हुआ।







विदेश के लिए पासपोर्ट की बाधा







बाल्यावस्था में कथा सुनाने वाली इस बाल विदुषी को धीरे-धीरे अन्य लोग भी जानने लगे। इसके बाद दूर-दूर से कथा श्रवण कराने का बुलावा आने लगा। स्तुति बहन ने बताया कि छत्तीसगढ़ में उन्होंने सर्वाधिक कथा सुनाई। धमतरी शहर में यह उनका चौथा प्रवास है। एमपी, यूपी, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान में कथा सुना चुकी है। विदेश से बुलावा आया था, लेकिन पासपोर्ट नहीं होने के कारण वहां का प्रवचन छूट गया।







शादी के बाद छोड़नी पड़ेगी गद्दी







बाल विदुषी ने बताया कि आज के युग में धर्म का विस्तार होना अत्यधिक आवश्यक है। सारा काम धर्म अनुरूप ही होता है। धर्म बिना जीव आगे नहीं बढ़ सकता। धर्म ही जीवन जीना सिखाता है। जब तक मन होगा तब तक प्रवचन करुंगी, लेकिन परिणय सूत्र में बंधते ही उसे प्रवचन की गद्दी छोड़नी पड़ेगी। इसके बाद उसकी सबसे छोटी बहन स्मृति प्रवचन करेगी।







पूरा परिवार शामिल







स्तुति के प्रवचन में उसकी माता रीता तिवारी को छोड़ पूरा परिवार उस दौरान उपस्थित रहता है। पिता गोविंद माधव तिवारी (49) तबला संभालते हैं। सबसे बड़ी बहन श्रुति मंच में व्यवस्था देखती है। छोटी बहन स्मृति मटका से ताल देती है और स्तुति हारमोनियम थामे कथा का रसपान कराती है। स्तुति ने बताया कि पिता के साथ तीनों बहनें धर्म बांट रही है। इस कार्य से उसे आत्मीय संतुष्टि मिलती है और परिवार की कमी नहीं खलती। स्तुति ने बताया कि उसकी पढ़ाई अभी भी जारी है। इस वर्ष बीए प्रथम में शामिल हुई है।





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