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अब कैसे बचेंगे दुश्मन नक्सली इस इजराइली हेरोन से, क्योंकि..

9 वर्ष पहले
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रायपुर. दक्षिण बस्तर के घने जंगल वाले दुर्गम इलाकों में छिपे नक्सलियों के खिलाफ सटीक हमले करने के लिए पुलिस को इजराइली मानवरहित विमान (यूएवी) हेरोन के रूप में नया हथियार मिला है। तीन महीने के अंदर पुलिस ने यूएवी हेरोन से मिली लाइव तस्वीरों की मदद से आधा दर्जन बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया। नतीजों से उत्साहित राज्य पुलिस ने एक अलग यूएवी की मांग केंद्रीय गृहमंत्रालय से की है। प्रयोग के तौर पर हेरोन का इस्तेमाल पिछले साल अक्टूबर से शुरू किया गया। इसका बेस आंध्रप्रदेश के बेगमपेठ हवाई अड्डे में बनाया गया है। 500 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने वाला हेरोन छतीसगढ़ और उड़ीसा सीमा से लगे इलाकों की तस्वीरें लेता चलता है। यहां के नतीजों के आधार पर झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी इसके इस्तेमाल की तैयारी है। सीआरपीएफ के सूत्रों के अनुसार गत शुक्रवार को खुद केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने सीआरपीएफ मुख्यालय दिल्ली में इस पूरी योजना को देखा। उन्होंने झारखंड और छतीसगढ़ की सीमा पर नक्सलियों के मूवमेंट की लाइव फुटेज भी देखीं। हेरोन 15 से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ता है। एक बार में वह 36 घंटे तक उड़ान भर सकता है। चिदंबरम नक्सलियों के खिलाफ इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन पर जोर दे रहे हैं। ताकि हमलों का नतीजा निकले। बस्तर जैसे इलाकों में सूचनाओं का माध्यम ह्यूमन इंटेलिजेंस या मुखबिरों से मिलने वाली सूचनाएं ही हैं। परेशानी यह है कि इनकी पुष्टि करना मुश्किल होता है और ये सूचनाएं काफी देरी से मिलती हैं। सूचनाओं के आधार पर हमले की तैयारी करने में कम से कम 24 घंटे लगते हैं। इतनी देर में नक्सली उस जगह से 10-12 किमी दूर चले जाते हैं। यूएवी से मिलने वाली लाइव तस्वीरों से हमले की योजना बनाना आसान हो जाता है। हालांकि नक्सली ऑपरेशन के अनुभवी लोगों का कहना है कि इस तरह के हमलों के लिए फोर्स को ट्रेंड करना जरूरी है। हेरोन की खासियत हेरोन यूएवी में दिन और रात में देख सकने की क्षमता वाले शक्तिशाली कैमरे लगे हैं। इंफ्रारेड कैमरा रात में भी हजारों फीट ऊपर से जमीन की साफ तस्वीरें लेता है। इसमें सिंथेटिक अपर्चर रॉडार भी लगा है। कहां हुआ इस्तेमाल * इजराइल से मिले हेरोन यूएवी का दिसंबर 2004 में आई सुनामी के दौरान राहत कार्य के लिए जमकर इस्तेमाल किया गया था। * भारत के पास इस समय करीब 12 हेरोन है। ऐसे 50 और हेरोन खरीदने की योजना है। ञ्चनक्सली ऑपरेशन के लिए प्रयोग किए जा रहे हेरोन यूएवी कुछ एडवांस फीचर्स के साथ हैं। यूएवी का संचालन सीआरपीएफ कर रहा है। इसके नतीजे अच्छे मिले हैं, ऐसी रिपोर्ट है। राज्य ने अपने लिए अलग से यूएवी मांगा है। इसका बेस जगदलपुर या रायपुर में होगा। कुछ सालों पहले वायुसेना के यूएवी की मदद से भी इसी तरह के आपरेशन किए गए थे। अनिल एम नवानी, डीजीपी बस्तर में क्यों जरूरी * दक्षिण बस्तर के ज्यादातर हिस्सों में घने जंगल वाला दुर्गम इलाका है। ज्यादातर इलाके में पक्की सड़कें हैं ही नहीं। * अबूझमाड़ में तो मोबाइल फोन तक काम नहीं करते। ऐसे में पुलिस व खुफिया एजेंसियां केवल आम लोगों पर ही निर्भर होती हैं। * कई बार सूचनाएं मिलने में देरी से कार्रवाई नहीं हो पाती। यूएवी से रियल टाइम पिक्चर मिल रही है। फोर्स और खुफिया जानकारी हो, तो फोर्स एक से तीन घंटे में हमले कर सकती है।

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