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आदिवासियों को उच्च शैक्षिक संस्थाओं में 32 फीसदी कोटा

10 वर्ष पहले
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रायपुर. विधानसभा में गुरुवार को छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्था (प्रवेश में आरक्षण) विधेयक 2012 पारित कर दिया गया। इसके तहत उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए आदिवासियों को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 12 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि नए विधेयक के अनुसार अब अनुसूचित जाति के आरक्षण का प्रतिशत 4 फीसदी कम हो जाएगा। केंद्र के नियमों के अनुसार जनसंख्या के आधार पर 32, 12 व 6 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन राज्य में कुल 58 फीसदी आरक्षण होगा। यदि वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों में जनसंख्या बढ़ने से बदलाव आया तो विधानसभा में फिर संशोधन विधेयक लाकर इसमें बदलाव किया जाएगा। अन्य राज्यों का अध्ययन करने के बाद स्पष्ट हुआ कि 56 प्रतिशत तक आरक्षण देने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। एमपी-सीजी में 8 करोड़ की जनसंख्या के अनुसार आरक्षण का प्रावधान था। छत्तीसगढ़ बनने पर 2.10 करोड़ जनसंख्या के अनुसार प्रावधान किया गया। अब क्या होगा मुख्यमंत्री ने बताया कि विधेयक पारित हो जाने के बाद अब शैक्षणिक संस्थाओं में अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों को अधिक संख्या में प्रवेश का लाभ मिलेगा। राज्य सरकार द्वारा खोले गए डेंटल, कृषि व मेडिकल कॉलेजों में इन वर्गो के बच्चों को पढ़ने का पर्याप्त मौका मिलेगा। सरकार ने इन्हें पीएससी व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग देने का इंतजाम भी किया है। अजा का आरक्षण 16 फीसदी हो : कांग्रेस - विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों ने अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण कम करने का विरोध किया। नंद कुमार पटेल ने कहा कि यदि आप विधेयक सर्वसम्मति पारित करवाना चाहते हैं तो अजा का आरक्षण 12 से बढ़ाकर 16 प्रतिशत कर दीजिए। आदिवासियों को 32 व ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण पर आपत्ति नहीं है।