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गरीब बच्चों का स्कूल दें ब्योरा फिर निदेशालय देगा राशि

10 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. अब दिल्ली के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को गरीब कोटे व वंचित कोटे में दाखिला पाने वाले बच्चों व उन पर किए गए खर्च का पूरा ब्योरा देना होगा। शिक्षा निदेशालय की तरफ से जारी आदेश के अनुसार ऐसा करने पर ही स्कूलों को संबंधित राशि का भुगतान किया जाएगा। दरअसल, निदेशालय को स्कूलों में हो रहे ऐसे दाखिलों व बच्चों पर हो रहे खर्च संबंधी जानकारी स्कूलों द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जा रही थी। ऐसे में निदेशालय ने यह निर्णय लिया है कि जब तक स्कूल ब्योरा नहीं देंगे तब तक उन्हें भुगतान नहीं किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों को यह भी बताना होगा कि उन्होंने कितने बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर अपने स्कूलों में दाखिला दिया है। इस विषय में शिक्षा निदेशक दीवान चंद की तरफ से निजी स्कूलों के प्राध्यापकों और मैनेजर को आदेश दिया गया है कि वह जल्द से जल्द सत्र 2010-2011 में दाखिला पाने वाले बच्चों पर किए गए खर्च का पूरा ब्योरा निदेशालय को शपथ पत्र के रूप में अपने अपने जिला के उपशिक्षा निदेशक को उपलब्ध कराएं। गौरतलब है कि मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के प्रावधानों के अनुसार, सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में 25 फीसदी आधार पर आर्थिक पिछड़े वर्ग व वंचित समूह के बच्चों को दाखिला व निशुल्क शिक्षा अनिवार्य है। वहीं आरटीई एक्ट 2009 की सेक्शन 12 के सब सेक्शन दो व मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून 2011 के नियम 11 में सरकार मुफ्त शिक्षा के बदले में निजी स्कूलों को प्रति बच्चे के हिसाब से भुगतान करती है। निदेशालय की ओर से जनवरी 2012 में ही इससे संबंधित जानकारी का ब्योरा मांगा गया था, लेकिन अब तककई स्कूलों ने निदेशालय को जानकारी मुहैया नहीं कराई है।