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इस खबर को पढ़ते ही दूर हो जाएगा प्रमोशन से सम्बंधित हर 'कंफ्यूजन'

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में पढ़ाने को लेकर ‘कैजुअल अप्रोच’ रखने वाले फैकल्टी यानी अध्यापक प्रमोशन के हकदार नहीं होंगे।





आने वाले दिनों में प्रमोशन ‘वरिष्ठता’ या ‘डेट ऑफ ज्वायनिंग’ के बजाए क्लास में फैकल्टी की परफार्मेंस पर आधारित होगा। फैकल्टी की काबिलियत को उनकी योग्यता, क्लास में उनकी उपस्थिति, टीचिंग से छात्रों को फायदा और रिजल्ट को शामिल किया जा सकता है।





सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रमोशन को परफार्मेंस बेस्ड असेसमेंट सिस्टम (पीएबीएस) से लिंक करना चाहती है। इसे बारहवीं योजना के पहले साल से ही लागू करने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक इससे शिक्षण के पेशे की प्रतिष्ठा बढ़ाने में मदद मिलेगी।





सरकार ‘नेशनल मिशन ऑन टीचर्स’ को भी बारहवीं योजना के पहले साल से ही शुरू करना चाहती है। इसमें भी अध्यापकों की गुणवत्ता पर खासा जोर होगा।





उच्च संस्थानों को दी जाने वाली यूजीसी ग्रांट को फैकल्टी रिक्तियों से जोड़कर खाली पदों को भरने की कवायद तेज की जाएगी। अध्यापकों के खाली पद निश्चित अवधि में न भरे तो संस्थानों की ग्रांट भी रुकेगी।





श्रेष्ठ प्रतिभाओं को जोड़ने की मंशा : सूत्रों का कहना है कि अच्छी प्रतिभाओं को शिक्षण पेशे से जोड़ने के लिए ‘नेशनल मिशन ऑन टीचर्स’ डॉ. सीएनआर राव द्वारा प्रस्तावित मॉडल पर लागू होगा।





विभिन्न विषयों और परंपरागत विधाओं में श्रेष्ठ प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करके उन्हें औपचारिक शिक्षा में एसोसिएट फैकल्टी के तौर पर जोड़ने की योजना बनाई गई है।





यह खासतौर पर मानविकी, लिबरल आर्ट्स, भाषा और एपीग्रेफी व कैलियोग्राफी जैसी विधाओं के लिए उपयोगी होगी। बारहवीं योजना के शुरू होते ही उच्च शिक्षण संस्थानों में फैकल्टी की कमी और इस क्षेत्र में बेहतरीन प्रतिभाओं को जोड़ने का काम शुरू होगा।





नकेल की भी योजना : कम योग्यता वाले अध्यापकों को नियुक्त करने वाले संस्थानों पर नकेल कसने की तैयारी की गई है। सूत्रों का कहना है कि निर्धारित अर्हता से कम पर नियुक्ति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।





यह संस्थानों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। टीचर्स ट्रेनिंग अनिवार्य पहलू होगा। पहले से पढ़ा रहे लोगों को निरंतर ट्रेनिंग व रिफ्रेशर कोर्स के जरिए अपडेट करना होगा।





सुधार की जरूरत : हाल में एक टॉस्क फोर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थानों में 40 फीसदी और केंद्र के उच्च शिक्षण संस्थानों में करीब 35 फीसदी फैकल्टी की कमी है। इनमें विश्वविद्यालय, आईआईटी व आईआईएम जैसे संस्थान शामिल हैं।





लगभग 86 विश्वविद्यालयों में टीचर्स एजुकेशन डिपार्टमेंट नहीं हैं। बारहवीं योजना के दौरान इनमें यह विभाग शुरू कराने की योजना है। रिसर्चर को फैकल्टी के तौर पर नियुक्त करने और विजिटिंग प्रोफेसर की योजना को मजबूत बनाने की तैयारी है।





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