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किताबों व ब्रांडेड जूतों पर भड़के पेरेंट्स, एक घंटे तक चली प्रिंसपल से बहस

8 वर्ष पहले
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अम्बाला। सोमवार को शहर के सेंट जोसेफ स्कूल में अभिभावकों ने फीस बढ़ाने के विरोध में स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा किया। फीस के साथ-साथ जबरदस्ती जूते व किताबों की कीमत बढ़ाने से भी लोग खफा थे। प्रिंसिपल के साथ एक घंटे की बहस के बाद भी जब कोई हल न निकला तो अभिभावकों ने डीसी निवास के बाहर प्रदर्शन किया और उनके पीए को मांग पत्र सौंपा।

मंगलवार को सुबह फिर बच्चों के मां-बाप अपना विरोध दर्ज करने के लिए स्कूल के बाहर एकत्र होंगे। अगर उनकी मांगें नहीं मानी तो वे बैठक कर अगली रणनीति की घोषणा करेंगे। स्कूल प्रशासन ने मांगों पर विचार करने के लिए अभिभावकों से कुछ वक्त मांगा है।

सुबह सेंट जोसेफ स्कूल में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंचे और वहां मौजूद वाइस प्रिंसिपल से फीस बढ़ोतरी और जबरदस्ती एक खास ब्रांड के जूते ही बच्चों को देने का विरोध करने करने लगे। जब उन्हें कोई तसल्ली बख्श जवाब नहीं मिला तो अभभावक विरोध करने लगे। पहले सभी को बताया कि प्रिंसिपल किसी काम से बाहर गई हैं। हंगामा होते देख प्रिंसिपल लौट आईं।करीब एक घंटे तक अभिभावकों और प्रिंसिपल में बहस होती रही लेकिन कोई हल नहीं निकला।

अभिभावकों के सवाल, प्रिंसिपल के जवाब

अभिभावक : स्कूल की फीस में पुराने विद्यार्थियों के लिए 300 से चार सौ रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई है, जो गलत है।
प्रिंसिपल : मैंने बच्चों को बेहतर एजुकेशन देने के लिए ऐसा किया है।
अभिभावक : हर कोई अफोर्ड नहीं सकता है।
प्रिंसिपल : ब्रांडेड कपड़ों पर भी तो खर्च करते हैं फिर शिक्षा पर होगा तो महंगा क्या है?
अभिभावक : कोई भी जूता जो अच्छा लगे, बच्चा क्यों नहीं पहन सकता।
प्रिंसिपल : केवल बाटा कंपनी का पालिश किया हुआ जूता ही पहनने दिया जाएगा।
अभिभावक : कॉपियों की कीमत बहुत अधिक है। जो कॉपी आप दे रहे हैं, बाजार से उससे कम कीमत पर कॉपी मिलती है।
प्रिंसिपल : इस सत्र में कॉपी में महंगा कागज लगाया गया है। अगले सत्र में हल्का कागज लगाकर कॉपी सस्ती कर देंगे।
अभिभावक : वर्दी का कपड़ा व जूते तय करने से पहले हमसे सलाह कर लेनी चाहिए थी।
प्रिंसिपल : आप जूतों और ड्रेस को लेकर क्या बात कर रहे हैं? जब बच्चे बर्थ-डे पर महंगे कपड़े पहन कर आते हैं तो फिर सोचा सभी अफोर्ड कर लेंगे। इसके बाद अभिभावक प्रिंसिपल के तर्क से सहमत नहीं हुए।


हम अपना स्टैंडर्ड डाउन नहीं करेंगे: प्रिंसिपल बैनर्जी

प्रिंसिपल किरण बैनर्जी का कहना है कि कुछ लोगों के विरोध के कारण वे अपने स्कूल का स्टैंंडर्ड डाउन नहीं करेंगी। दबाव में आकर मैं गलत काम नहीं करूंगी। जब वे बच्चों को लाख रुपए की बाइक खरीद कर दे सकते हैं तो फीस क्यों नहीं दे सकते। अगर अभिभावकों को उनके नियम पसंद नहीं है तो बच्चों को किसी दूसरे स्कूल में दाखिल करा लें। शहर में उनसे भी अच्छे स्कूल हैं। विरोध कर रहे 60-70 लोगों के लिए पूरे स्कूल नियम नहीं बदल सकती।