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दुनिया में धूम मचाने को तैयार हरियाणवी बोली

9 वर्ष पहले
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रेवाड़ी. हरियाणवी संवाद और चुटकले विश्व पटल पर काव्य गोष्ठियों एवं फिल्मों के माध्यम से धूम मचा रहे हैं। अब साहित्य यहां तक कि महान ग्रंथ गीता के श्लोक भी अब हरियाणा बोली में पंडित जी उच्चरण करते नजर आए तो कोई हैरानी नहीं होगी। रेवाड़ी जिले में 10 से ज्यादा साहित्यकार व कवि हरियाणवी बोली को भाषा के रास्ते पहचान देने में लगे हैं। इन लेखकों का दावा है कि वह दिन दूर नहीं जब हरियाणवी बोली पूरी दुनिया में धूम मचाएगी। हाईटेक की इस दुनिया में जहां अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर भाषा को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में हरियाणवी बोली को लेकर भी दुस्साहस कहे या साहस एक गति दी जा रही है। गांव खोरी निवासी दर्शना शर्मा ने 12 साल की कड़ी तपस्या के बाद महान ग्रंथ गीता के संस्कृत में 700 श्लोकों को हरियाणवी बोली में बदल दिया। पुस्तक का नाम दिया न्यू का न्यू यानि उच्चरण के समय संस्कृत दोहों को हरियाणवी में बोला जाए तो भाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 16 सितंबर को इस पुस्तक का विमोचन हुआ। दर्शना का मानना है कि हमारी बोली में सैकड़ों शब्द ऐसे हैं जो संस्कृत से लिए गए हैं। गीता के श्लोकों को हरियाणवी मे लिखते समय पद्यानुवाद शैली अपनाई गईं ताकि रागनी या गीत के तौर पर भी इन्हें आसानी से गाया जा सके। इस कवियत्री का दावा है कि उनकी यह कोशिश हाशिए पर आ चुके लोक साहित्य को गति देगी। शिक्षाविद् एवं लोक साहित्यकार सत्यवीर नाहड़िया का कहना है कि आज के परिवेश में लोक साहित्य को लिखने के लिए लोक भाषा की जरूरत पड़ती है। लोक संस्कृति में लोक गीत, कथा, गाथाओं को ज्यों का त्यों दिया जाए तो उसकी मौलिकता बनी रहती है। पिछले चार-पांच साल से हरियाणावी बोली को अब हर विधा में लिखा जा रहा है। अगर यही रफ्तार रही तो वह दिन दूर नहीं जब यह बोली भाषा बन जाएगी। अभी तक यहीं तर्क दिया जाता रहा है कि हरियाणवी की लिपि नहीं है । उदाहरण के तौर पर काला, दीवाली, होली को हरियाणवी बोली में कैसे लिखें, लेकिन अब लिखे जाने लगा है। इस बोली की एक नई शब्दावली को मान्यता मिल रही है। इसलिए हरियाणवी को एक विधा में नहीं उपन्यास, कहानी, रागनी, कविता में बहुत बेहतर ढंग से लिखा जा रहा है। इस बोली का भविष्य उज्जवल है। रचनाकार पुस्तकें/अन्य रचनाएं हलचल हरियाणवी बीकानेर मौज हो रही सै. सत्यवीर नाहड़िया लोकराग (हरियाणवी रागनी स्रंगह) आलोक भांडोरिया, इब रफ्तार बदलग्यी महाशय भीम सिंह लिसान गीता का रागनी विद्या में लेखन डॉ. लाज कौशल, कोसली नर तै आग्गै नारी हरियाणा काव्यपाठ महाशय केदारमल फतेहपुरी लोक कवि एवं ग्रंथावली प्रकाशित दलबीर फूल लिसान हरियाणवी में काव्यपाठ एवं सृजनरत देशराम देशप्रेमी कारोली हरियाणवी काव्यपाठ एवं सृजनरत