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रैगिंग..समझो उजड़ गया भविष्य

10 वर्ष पहले
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सोनीपत. बतौर सीनियर अपने जूनियर का किसी भी प्रकार से भद्दा मजाक करना, उसे मानसिक रूप से परेशान करना सीनियर के भविष्य को सीधे-सीधे खत्म कर सकता है। यही नहीं उसकी इस गलती से जहां उसका शैक्षणिक भविष्य अंधेरे में होगा तो वहीं दूसरी ओर उनके अभिभावक के सामने भी स्थिति शर्मसार कर देने वाली आ सकती है। क्योंकि दाखिले से पहले विद्यार्थी द्वारा भरे जाने वाले शपथ पत्र में अभिभावक भी अपने हस्ताक्षर से यह आश्वस्त करेंगे कि उनका बच्चा रैगिंग नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रैगिंग को लेकर बरती जा रही सख्ती के मद्देनजर विवि से लेकर कालेजों में इस बाबत अवगत करवा दिया गया है। उसी के हिसाब से विद्यार्थियों के दाखिले किए जाएंगे। वहीं विश्व विद्यालय ने कालेजों से कहा कि वे एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्यों के नंबर कैंपस में लिखवाएं ताकि कोई भी विद्यार्थी फोन पर शिकायत कर सके। रैगिंग के दोषी के खिलाफ यह हो सकती है कार्रवाई > विश्वविद्यालय/कालेज द्वारा दी जा रही छात्रवृत्ति या विशेष सुविधाएं समाप्त > विश्वविद्यालय/ कालेज द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेने से रोक > परीक्षा परिणामों को रोका जाना > क्षेत्रीय, राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं विश्वविद्यालय कालेज का प्रतिनिधित्व करने पर रोक। > हॉस्टल से निकाला जाना > विश्वविद्यालय/कालेज में प्रवेश को रद्द और एक से तीन साल के लिए निष्कासित > एक निश्चित समय के लिए किसी भी अन्य विश्वविद्यालय/कालेज में दाखिले पर रोक > 25 हजार रुपए का आर्थिक दंड देनी होगी गारंटी दीनबंधु सर छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल के कुलसचिव डा. आरके अरोड़ा बताते हैं रैगिंग अब माफी योग्य गलती नहीं है। बच्चों को दाखिले के लिए दिए जाने वाले प्रोस्पेक्टस में भी इस बाबत एक फार्म होगा, जोकि अभिभावक को भरना होगा। जिसमें यह एक प्रकार से गारंटी होगी कि बच्चा रैगिंग जैसी गतिविधि में शामिल नहीं रहेगा। वे बच्चों को रैगिंग से दूर रहने की शिक्षा देंगे। आ चुके हैं मामले सामने क्षेत्र के इंजीनियरिंग कालेजों में रैगिंग की बीमारी अपने पंजे से वार कर चुकी है। मुरथल स्थित इंजीनियरिंग कालेज में वर्ष 2010 एवं 2011 में इस प्रकार के दो मामले सामने आए थे। जिसके बाद विवि ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को बाहर कर दिया था। इसके बाद अन्य कालेजों में कोई मामला तो देखने को नहीं मिला पर सख्ती सबने कर दी थी। कालेज व विवि का कहना है कि ऐसे मामले सहन नहीं होंगे। एंटी रैगिंग कमेटी रैगिंग रोकने के लिए हर कालेज में एंटी रैगिंग कमेटी का गठन किया जाएगा। यह कमेटी जहां विद्यार्थियों को रैगिंग से दूर रहने के लिए प्रेरित करेगी तो वहीं रैगिंग करने वाले विद्यार्थी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी करेगी। कमेटी में वरिष्ठ प्राध्यापकों के साथ नान टीचिंग सदस्यों एवं प्रिंसिपल भी शामिल रहेगा। इनके नां व नंबर नोटिस बोर्ड व कैंपस में लिखवाए जाएंगे। कोई भी इन पर शिकायत कर सकेगा। जहां हुआ जमावड़ा वहीं.. जीवीएम गल्र्स कालेज की प्राचार्य डा. ज्योति जुनेजा बताती है कि रैगिंग को लेकर इस बार विशेष सख्ती बरती जाएगी। कालेज परिसर में पेड़ के नजदीक, कैटींन एवं हास्टल में जहां कहीं भी छात्राओं का जमावड़ा होगा वहीं एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य पहुंचकर देखेंगे माजरा क्या है। यही नहीं कोने-कोने में सीसीटीवी कैमरे से भी बच्चों पर निगाह रखी जाएगी। कालेज में एंटी रैगिंग के पोस्टर लगाए जाएंगे। सीसीटीवी की फुटेज भी कमेटी के सदस्य समय-सयम पर देखेंगे।