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एचपीयू ने यूजी की परीक्षा फीस बढ़ाई

9 वर्ष पहले
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शिमला. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबंधित कॉलेजों की अंडर ग्रेजुएट परीक्षाओं में छात्रों को अतिरिक्त फीस चुकानी होगी। प्रशासन की ओर से जारी आदेशों के बाद अब छात्रों को 150 रुपए अधिक चुकाने होंगे।

नॉन टेरिबल मार्कशीट को लेने के लिए छात्रों को सौ रुपए अधिक देने पड़ेंगे। फार्म भरने की फीस भी 50 रुपए बढ़ाई गई है। हालांकि प्रशासन ने तर्क दिया है कि सौ रुपए सिर्फ अंक तालिका देने के बदले छात्रों से लिए जाएंगे।

प्रशासन के इस फैसले के बाद अब छात्रों को वार्षिक परीक्षाओं के फार्म भरने के समय 120 रुपए की जगह 270 रुपए देने होंगे। प्रशासन के इस फैसले का एससीए ने विरोध किया है। एससीए का कहना है कि मार्कशीट के 100 रुपए बेवजह ही छात्रों पर थोपे जा रहे हैं।

कंप्यूटराइज्ड मार्कशीट छात्रों को सिर्फ 10 से 20 रुपए में उपलब्ध करवाई जा सकती है, फिर भी छात्रों से सौ रुपए अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2010 के सत्र में छात्रों की फार्म भरने की फीस 85 रुपए कर दी थी। इसके बाद 2011 के सत्र में इसे 120 रुपए कर दिया गया था।

प्रेक्टिकल और अन्य चार्जिज भी इसमें जोड़े गए थे। इस सत्र में फार्म की फीस 50 रुपए बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही छात्रों को 170 रुपए अधिक चुकाने होंगे, साथ ही माक्र्सशीट के सौ रुपए भी बढ़ाए गए हैं।

दो लाख छात्र होंगे प्रभावित

प्रदेश भर के 97 कॉलेजों के लगभग दो लाख छात्रों पर फीस बढ़ाने का असर पड़ेगा। साथ ही सौ रुपए अधिक भी चुकाने होंगे। एचपीयू से संबंधित कॉलेजों में अभी तक सबसे कम फीस है। पिछले तीन वर्षों से प्रशासन ने फीस में हल्की बढ़ोतरी की है।

एचपीयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. नरेंद्र अवस्थी का कहना है कि इस बार परीक्षा फीस में हल्की बढ़ोतरी हुई है। छात्रों से सौ रुपए सिर्फ मार्कशीट के लिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि छात्रों को इस बार कंप्यूटराइज्ड और नॉन टेरिबल मार्कशीट दी जाएगी। इस मार्कशीट से छात्रों को फायदा होगा। इसकी न तो डुप्लीकेसी हो सकेगी और न ही इसका दुरुपयोग हो पाएगा।

एससीए करेगी घेराव

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एससीए जल्द ही इस मामले में परीक्षा नियंत्रक का घेराव करेगी। एससीए अध्यक्ष राहुल चौहान का कहना है कि प्रशासन बेवजह ही फीस बढ़ा रही है। साल दर साल फीस में बढ़ोतरी की जा रही है। अब जबकि कंप्यूटराइज्ड मार्कशीट दी जा रही है, उसकी भी अतिरिक्त फीस वसूली जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासन ने अपने आदेश यदि वापस नहीं लिए तो उन्हें मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।