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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कर रहा है फीस बढ़ाने की तैयारी

9 वर्ष पहले
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शिमला. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले छात्रों को आने वाले दिनों में महंगी पढ़ाई के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
विवि प्रशासन ने धीरे-धीरे फीस में बढ़ोतरी करनी शुरू कर दी है। हाल ही में यूजी के फॉर्म फीस में बढ़ोतरी करने से इसके संकेत विवि ने दिए हैं। रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी ने फीस बढ़ाने का जो खाका तैयार किया था, विवि प्रशासन उस पर जल्द ही अमल कर सकता है। वर्ष 1973 के बाद विवि में अब फीस बढ़ाने को लेकर कवायद चल रही है।
रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी ने फीस बढ़ोतरी को लेकर जो रिपोर्ट तैयार की थी, उसे विवि प्रशासन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजा था। आचार संहिता के चलते इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ। इसके साथ ही धीरे-धीरे विवि प्रशासन ने फीस में बढ़ोतरी करनी शुरू की है।
विवि प्रशासन ने हाल ही में बस किराया, पीएमटी फार्म और अब यूजी कक्षाओं के फॉर्म में बढ़ोतरी की है। इस फीस बढ़ोतरी का जहां छात्र संगठन विरोध कर रहे हैं, वहीं विवि प्रशासन का तर्क है कि मूल्य सूचकांक और सर्विस टैक्स बढ़ने से हल्की फीस बढ़ोतरी की गई है।
अभी तक विश्वविद्यालय पीएमटी की प्रवेश परीक्षा के प्रोस्पेक्टस की फीस भी दोगुना बढ़ा दी थी। एचपीयू के बस किराए में भी चार गुणा बढ़ोतरी की गई थी। अभी हाल ही में यूजी के परीक्षा फॉर्म में 150 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। पड़ोसी राज्यों की बात करें तो यहां के विश्वविद्यालय में एचपीयू से कहीं दोगुना अधिक फीस हैं।
40 साल पुराना फीस प्रारूप
रिसोर्स मोबेलाइजेशन कमेटी का गठन महंगाई और सुविधाओं को देखते हुए किया गया है। वर्ष 2006 में यह कमेटी बनाई गई थी। सरकार के शिक्षा सलाहाकार डॉ. ओपी चौहान की अगुवाई में कमेटी बनी। कमेटी ने बाहरी राज्य के विश्वविद्यालय के फीस की स्टडी की और पाया कि एचपीयू की अपेक्षा बाहरी राज्य में तीन से पांच गुणा ज्यादा फीस है। कमेटी ने पाया की एचपीयू में 40 साल पुराना फीस प्रारूप है।
हल्की बढ़ोतरी हुई
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. रणवीर वर्मा का कहना है कि फीस में बढ़ोतरी नहीं की गई है। मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी होने के साथ ही हल्की बढ़ोतरी जरूर होगी। विवि कहां से इतना खर्च करेगा। छात्रों पर ोझ नहीं डाला जा रहा है, इसका प्रशासन ख्याल रख रहा है। उनका कहना है कि किसी तरह की फीस बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
विवि की बढ़ेगी आय
एचपीयू की ओर से प्रस्तावित फीस को यदि बढ़ा दिया जाता है तो विवि की आय में अधिक बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में यूनिवर्सिटी की फीस और फंड आदि से मिलने वाली वार्षिक आय करीब 22 करोड रुपए है। नई फीस के लागू होने से आय करीब 35 करोड से अधिक हो जाएगी। इससे छात्रों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए प्रशासन के पास बजट होगा और पढ़ाई का स्तर भी बढ़ेगा।
इसलिए बढ़ोतरी
हॉस्टल में बिजली का बिल आठ लाख से ऊपर चुकाना पड़ता है। परीक्षा फॉर्म, हॉस्टल ओर बसों का जो शुल्क लिया जाता है वह लागत से काफी कम है। विश्वविद्यालय में लेट फीस जहां सौ रुपए हैं, वहीं शिक्षा बोर्ड एक हजार तक लेट फीस लेती है। नॉन सब्सिडाइज्ड सीटों की तो विवि में अधिक फीस है, जो सब्सिडाइज्ड सीटें हैं उसकी फीस अभी कम है। कई शिक्षकों का कहना है कि देश में सबसे कम फीस सिर्फ एचपीयू में है।