वीरभद्र सिंह लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ, मंत्रियों के नाम भी तय

9 वर्ष पहले
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शिमला. वीरभद्र सिंह ने छठी बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। मंगलवार को राज्‍यपाल ने उन्‍हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई (तस्‍वीरें देखिए)। वीरभद्र के नेतृत्‍व में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में 68 में से 36 सीटें जीती हैं। उन्‍हें एक निर्दलीय विधायक का भी समर्थन हासिल है।
ठियोग की विधायक विद्या स्टोक्स, द्रंग के विधायक कौल सिंह ठाकुर, नगरोटा बगवां के विधायक जीएस बाली, भरमौर के ठाकुर सिंह भरमौरी, बंजार के विधायक कर्ण सिंह, बल्ह के विधायक प्रकाश चौधरी, फतेहपुर के विधायक सुजान सिंह पठानिया, हरोली के विधायक मुकेश अग्निहोत्री और धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा को वीरभद्र ने मंत्री बनाने का फैसला किया है। विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह से हाथ मिलाकर चलने वाली विद्या स्टोक्स को मनचाहा विभाग मिलने की उम्‍मीद है। विद्या ने मुख्‍यमंत्री के बाद शपथ ली।
नेगी सलाहकार होंगे
पूर्व कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे पूर्व आईएएस अधिकारी टीजी नेगी वीरभद्र सिंह के सलाहकार होंगे। चुनावी टीम के सभी सदस्यों को कांग्रेस सरकार में ओहदेदारी प्राप्त होगी। पूर्व अफसरों में टीजी नेगी, टीसी जनारथा, सुभाष आहलुवालिया की अहम भूमिका रही है।
सीडी कांड में वीरभद्र और प्रतिभा बरी, सीएम का पद संभालने से पहले बड़ी राहत
बहुचर्चित सीडी मामले में शिमला की स्पेशल कोर्ट (वन) ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष वीरभद्र सिंह और उनकी प्रतिभा सिंह को बरी कर दिया है।
अदालत के इस फैसले की जानकारी वीरभद्र सिंह के वकील श्रवण डोगरा ने मीडिया को दी। सीडी मामले में वीरभद्र और प्रतिभा सिंह दोनों पर अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। यह मामला वर्ष 1989 का है।
उस समय वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे। कोर्ट ने कहा,‘इस बारे में कोई भी मामला नहीं बनता, क्योंकि एक भी गवाह ने प्रॉसीक्यूटर के सबूतों का समर्थन नहीं किया।’
यह था मामला
आरोप था कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र ने दाड़लाघाट में अंबुजा सीमेंट प्लांट के यूनिट को मंजूरी देने के लिए पद का दुरुपयोग किया। प्लांट लगाने के लिए औपचारिकताएं भी पूरी नहीं की गईं। प्रतिभा सिंह पर आरोप था कि उन्होंने अनुमति देने के लिए वीरभद्र सिंह पर दबाव बनाया।
राजनीति से प्रेरित था मामला: वीरभद्र सिंह
वीरभद्र सिंह फैसला आने के बाद बेहद खुश दिखे। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित था। पहले धूमल सरकार ने उनको सागर कत्था मामले और बाद में सीडी मामले में फंसाने का प्रयास किया। कोर्ट में सब झूठ साबित हुआ।
अदालत का निर्णय सर्वमान्य : मनकोटिया
वीरभद्र सिंह के खिलाफ घोटले से संबंधित कथित बातचीत की सीडी जारी करने वाले पूर्व पर्यटन मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने कहा कि अदालत का निर्णय सर्वमान्य है। इस पर कोई टिप्पणी करना सही नहीं होगा।
कब-कब क्या हुआ?
2007 : सीडी जारी
27 मई 2007 को मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने सीडी जारी की। उन्होंने दावा किया कि सीडी में वीरभद्र, प्रतिभा और तत्कालीन डीसी महेंद्र सिंह के बीच पैसों के लेन-देन की बात रिकॉर्ड है। रिकॉर्डिग 1989 की बताई गई थी।
2008 : जांच शुरू
2008 में भाजपा सरकार ने विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच सौंपी। मामले की चार्जशीट तैयार कराई। 3 अगस्त 2009 को एंटी करप्शन ब्यूरो ने वीरभद्र और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया।
2010 : चालान पेश
अक्टूबर 2010 को कोर्ट में चालान पेश किया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो ने कोर्ट में दावा कि उसके पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जिससे यह साबित होता है कि तीनों आरोपियों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर बातचीत हुई थी।
2012 : हाईकोर्ट से झटका
हाईकोर्ट में वीरभद्र सिंह की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने स्पेशल कोर्ट पर चल रहे मामले पर रोक लगाने की मांग की। ऐसा न होने पर सीबीआई से जांच मांग की गई। लेकिन, कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया।
25 जून 2012: आरोप तय
वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-7,11,13 (1) (डी) और धारा-120 बी के तहत आरोप तय किए गए। प्रतिभा सिंह के खिलाफ धारा-120 बी व भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा-9 के अधीन आरोप थे।
जून 2012 : मंत्री पद छोड़ा
25 जून 2012 को केंद्रीय मंत्री वीरभद्र और प्रतिभा सिंह के खिलाफ आरोप तय हुए। विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था और चार्जशीट 42 बिंदुओं पर आधारित थी। इसके बाद वीरभद्र ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।
फैसले में देरी क्यों?
वीरभद्र सिंह ने एफआईआर खारिज करवाने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी। मांग की थी कि ऐसा न होने पर मामला सीबीआई को सौंपा जाए। 7 जनवरी 2012 को हाईकोर्ट का फैसला आया। कोर्ट ने वीरभद्र को मामले में छूट देने से मना कर दिया और ट्रायल कोर्ट में जाने की सलाह दी। इसके बाद विशेष अदालत ने कार्यवाही फिर से शुरू की। इस वजह से फैसला आने में देरी हुई।