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सेंट्रल स्कूल में बच्चे पढ़ाने पर चुकानी होगी अधिक फीस

8 वर्ष पहले
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हमीरपुर/शिमला. सेंट्रल स्कूलों में पढ़ाई अब महंगी हो गई है। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने फीस में बदलाव करते हुए विद्यालय विकास निधि और कंप्यूटर फंड दोगुणा कर दिए है। सभी कक्षाओं की पढ़ाई महंगी हो गई है। लड़कों की ट्यूशन फीस में कोई फेर-बदल नहीं किया गया है जबकि बीपीएल और अपंग स्टूडेंट्स को भी राहत दी गई है।
जिन परिवारों की बेटी के रूप में एक ही संतान है, उन्हें भी अदायगी से दूर रखा गया है। केंद्रीय विद्यालय संगठन के ज्वांइट कमीशनर (फाइनेंस) एम. अरुमुगाम के हवाले से जारी सकरूलर में कहा गया है कि विद्यालय विकास निधि और कंप्यूटर फंड को लेकर बीओजी की बैठक में जो फैसले लिए गए थे उन्हीं को लागू किया जा रहा है।
फीस का यह रिवाइज स्ट्रक्चर पहली अप्रैल से देश भर के सभी केवीएस में लागू हो जाएगा। अब देखना यह है कि कई निजी स्कूलों के मुकाबले अब सेंट्रल स्कूलों का फीस स्ट्रक्चर बराबरी पर आ गया है। इसका एडमिशन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
आठवीं तक लगेंगे ६क्क् रुपए प्रतिमाह
पहली से आठवीं कक्षा की फीस अब 600 रुपए जबकि नौवीं और दसवीं का यह शुल्क 800 रुपए होगा। पहले यह 290 और 490 रुपए था। जमा एक व दो में कॉमर्स और हयुमैनिटिज की स्ट्रीम में जो फीस पहले 590 और 640 थी, उसे अब बढ़ा कर 900 और 950 कर दिया गया है, जबकि सांइस के स्ट्रीम में पहले 750 और 800 की मासिक फीस के स्थान पर अब प्रति स्टूडेंटस 1000 और 1050 रुपए वसूले जाएंगे। केंद्रीय कर्मचारियों और सैनिक परिवारों के बच्चों को इन स्कूलों में खास रियायत मिलती है। अब उन्हें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
इन्हें राहत भी मिली
केवीएस ने बीपीएल परिवारों को दो बच्चों तक दाखिले में ट्यूशन फीस और स्कूल विकास निधि से राहत दी है लेकिन उन्हें कंप्यूटर फीस देनी होगी। छठी और सातवीं कक्षा में जिन परिवारों की एक ही बेटी होगी, उन्हें ट्यूशन फीस, कंप्यूटर फीस और स्कूल विकास निधि से राहत दी गई है। वार विडो और जिन परिवारों ने युद्ध में शिरकत की है, उन्हें भी ट्यूशन फीस और स्कूल विकास निधि से छूट दी है।
पेरेंट्स की चिंता बढ़ी
केवीएस के देश भर में कुल 1089 स्कूल हैं, इसमें 51,604 कंप्यूटर्ज मौजूद हैं, जबकि 10,91,931 स्टूडेंट्स अध्यनरत हैं। अभी तक इन तमाम स्कूलों में गैर सरकारी स्कूलों के मुकाबले में काफी राहत संबंधित परिवारों को मिलती थी। इनके अलावा अब फीस स्ट्रक्चर में वृद्धि करने से संबंधित परिवारों में परेशानी और बेचैनी बढ़ गई है।