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हाईकोर्ट ने एचआरटीसी प्रबंधन को दिए निर्देशट्रेनिंग लिए चालकों को पहले दो नौकरी

9 वर्ष पहले
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शिमला। हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में ड्राइवरों की भर्ती मामले में व्यवस्था दी है कि जब तक वर्ष 2006 से 2012 तक ट्रेनिंग लिए ड्राइवरों को नौकरी नहीं दी जाती तब तक नए ड्राइवरों की नौकरी पर नहीं रख सकता है। कोर्ट ने उस विज्ञापन को रद्द कर दिया जिसके तहत हाल ही में 600 ड्राइवरों के पदों को भरने का निर्णय लिया था। मगर जिन ड्राइवरों को चयनित करने के बाद 15 दिनों की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी उसके बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया था।
न्यायाधीश डीपी सूद और न्यायाधीश संजय करोल की खंडपीठ ने न्यायालय के समझ आई 75 याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ये निर्णय सुनाया।
कोर्ट ने पाया की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर (एचआरटीसी) की ओर से 121वीं बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक उन सभी ड्राइवरों को 15 दिन की ट्रेनिंग देने का प्रावधान किया गया था जिन्हें कि 2006 से 2012 तक हुई चयन प्रक्रिया के दौरान चयनित तो कर लिया गया था, लेकिन कई कारणों से नियुक्ति का अवसर नहीं मिला।
न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि 2006 से 2012 तक जितने भी ड्राइवर चयनित किए गए थे और जिन्हें एचआरटीसी में नियुक्ति लेने का हक रखते हैं उन्हें कानूनी तौर पर दरकिनार करना न्यायोजित और तर्कसंगत नहीं है। कोर्ट ने सारी प्रक्रिया पर कोर्ट के फैसले के अनुरूप प्रभावी कदम उठाने के लिए एचआरटीसी को 3 सप्ताह का समय दिया है।
गौरतलब है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर (एचआरटीसी) की बैठक में चयनित ड्राइवरों को इस वर्ष 15 मार्च से 30 अप्रैल तक ट्रेनिंग दिलाई गई थी।
ट्रेनिंग के बाद जब इन ड्राइवरों को नियुक्ति की बारी आई तो एचआरटीसी ने नई चयन प्रक्रिया के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। इसको लेकर याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई थी।