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म्यांमार: 25 साल बाद हो रहे ऐतिहासिक संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग

7 वर्ष पहले
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यंगून। म्यांमार में 25 साल के लंबे अंतराल के बाद हुए ऐतिहासिक संसदीय चुनाव के लिए रविवार को वोटिंग हुई। कई साल तक नजरबंद रहीं विपक्ष की नेता आंग सान सू की की पार्टी के इस चुनाव में जीतने के अच्छे आसार हैं। सू की ने समर्थकों की भारी भीड़ के बीच अपना वोट डाला। जुंटा सरकार द्वारा लागू संविधान के मुताबिक सू की हालांकि राष्ट्रपति नहीं बन सकतीं, लेकिन वह कई बार दोहरा चुकी हैं कि अगर उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) जीतती है, तो वे राष्ट्रपति के पीछे की ताकत होंगी।
म्यांमार में चुनाव से पहले अनिश्चितता की स्थिति दिखा दी। सेना द्वारा बनाए गए संविधान के अनुसार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद का चुनाव कोई ऐसा व्यक्ति नहीं लड़ सकता जिसके बच्चे विदेशी नागरिकता वाले हों। इस व्यवस्था के तहत ही विपक्ष की नेता आंग सान सूकी राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ सकतीं।

इस चुनाव में 40 लाख वोटर्स अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए, जिससे इस चुनाव के निष्पक्षता को लेकर अभी से सवाल खड़े हो गए हैं। एनएलडी ने मतदान से पहले आरोप लगाया था कि कुछ इलाकों में भारी संख्या में अतिरिक्त वोटिंग टिकट जारी किए गए। उन्होंने बताया कि यंगून के एक परिवार को 38 टिकट दिए गए। कट्टर बौद्ध राष्ट्रवादियों ने पहले ही चुनाव प्रचार को प्रभावित करने का काम किया था।
बता दें यह चुनाव संसद की केवल 75 फीसदी सीटों के लिए कराया गया। एक चौथाई सीटें गैर निर्वाचित सैनिक अधिकारियों के नॉमिनेशन के जरिए भरी जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि इस चुनाव के नतीजे धीरे-धीरे आएंगे। उनका कहना था कि कुछ संसदीय सीटों के नतीजे सोमवार तक जारी किए जा सकते हैं, लेकिन पूरी तस्वीर सोमवार शाम से पहले साफ नहीं हो पाएगी।