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तालिबान का विरोध किया तो लड़की को गोली मारी

10 वर्ष पहले
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पेशावर। पाकिस्तान में तालिबान के खिलाफ आवाज उठा कर दुनिया भर में 'हीरो' बन चुकीं 14 साल की मलाला युसुफजई अब खतरे से बाहर हैं। बुधवार को पेशावर के एक अस्‍पताल में डॉक्‍टरों ने उनका ऑपरेशन कर सिर से गोली निकाल दी।
डॉक्‍टरों का कहना है कि अब उसकी हालत स्थिर है लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है। उन्‍हें मंगलवार को तालिबान आतंकियों ने गोली मार दी थी। मलाला ने तालिबान के फरमान के बावजूद लड़कियों को शिक्षित करने का अभियान चला रखा है। क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान ने मलाला पर हुए हमले की आलोचना करते हुए कहा कि वो इस घटना के बाद से परेशान है। इमरान खान ने यह भी कहा कि वो मलाला का हालचाल जानने पेशावर जाएंगे।
तालिबान आतंकी इसी बात से नाराज होकर उन्‍हें अपनी हिट लिस्‍ट में ले चुके हैं। मंगलवार को दिन में करीब सवा 12 बजे स्वात घाटी के कस्बे मिंगोरा में स्‍कूल से लौटते वक्‍त उन पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले की जिम्‍मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने ली। साथ ही, धमकी दी कि अगर मलाला बच गई तो उस पर दोबारा हमला करेंगे। मलाला पर हमले के बाद अब तालिबान ने उसके परिजनों पर भी हमले की धमकी दी है।