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ईरान में सत्ता बदलने से पहले अमेरिका ने कड़े किए प्रतिबंध

8 वर्ष पहले
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वाशिंगटन/तेहरान. अमेरिका ईरान में सत्ता बदलने से पहले उस पर प्रतिबंध और कड़े करना चाहता है। बुधवार को अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने इस आशय के प्रस्ताव को 400 मतों से मंजूरी दे दी। विरोध में केवल 20 वोट पड़े। अब यह प्रस्ताव सीनेट के पास जाएगा और सितंबर तक इस पर राष्ट्रपति ओबामा के हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
ईरान में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रूहानी रविवार को पद की शपथ लेंगे। प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के चेयरमैन एड रॉयस ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई परमाणु हथियार विकसित करना चाहते हैं।
यह तथ्य मायने रखता है। व्हाइट हाउस भी ईरान पर प्रतिबंध कड़े करना चाहता है। लेकिन वह यह भी चाहता है कि नए राष्ट्रपति रूहानी को एक मौका दिया जाना चाहिए। इसीलिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने पिछले हफ्ते ईरान को कुछ राहत दी थी। उसने बिना अनुमति खरीदी जाने वाली दवाओं की सूची में कुछ और दवाएं जोड़ दी थीं।
क्या चाहता है अमेरिका
- ईरान का तेल उत्पादन दस लाख बैरल प्रतिदिन तक सीमित हो।
- विकल्प न तलाशने वाले खरीदारों पर भारी जुर्माना लगाया जाए
- विदेशी खातों तक ईरान की पहुंच सीमित की जाए
- ईरान के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग करने वाले देशों को दंडित किया जाए
इससे पहले क्या किया था
- यूरोपीय संघ व अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को आधे से भी कम कर दिया था।
- अमेरिका ने ईरान के बड़े ग्राहकों को कच्चा तेल खरीदने का विकल्प तलाशने को मजबूर किया था। इन देशों में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया भी शामिल थे।
अब क्या हो सकता है असर :
-भारत सहित एशियाई देशों में तेल के दाम बढ़ सकते हैं।
-जरूरतें पूरी करने के लिए देशों को ईरान के अलावा अन्य विकल्प देखने पड़ेंगे।
-तेल की आपूर्ति घटने से एशियाई रिफाइनरियों पर बड़ा बोझ पड़ेगा।