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आईना: साइना नेहवाल, बैडमिंटन खिलाड़ी ‘जज्बे से दूर की निराशा’

8 वर्ष पहले
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मेरा नाम.. साइना साईं नाम से बना है। दरअसल, मैं और मेरा परिवार साईं बाबा में बहुत विश्वास रखते हैं। इसलिए मेरा नाम उन्हीं के नाम से लिया गया है।





मेरा मन खुश होता है..





जब मैं कोई कड़ा मुकाबले जीतने में कामयाब रहती हूं। किसी दूसरे खिलाड़ी के बेहतरीन खेल को देखकर भी मुझे बहुत अच्छा लगता है और मैं उसे एंजॉय करती हूं।





मन उदास हुआ था..





जब मैं बीजिंग ओलंपिक खेलों में कोई मेडल नहीं जीत पाई थी। इन खेलों के बाद मैं काफी निराश रहने लगी थी।





जिंदगी बदलने वाली सलाह..





मुझे गोपी सर (कोच पुलेला गोपीचंद) ने बीजिंग खेलों में हाथ लगी निराशा के बाद दी थी। उन्होंने सवाल किया था, ‘मुझे बताओ कि कौन सा खिलाड़ी ऐसा है, जो कभी हारा नहीं? मोहम्मद अली, स्टेफी ग्राफऔर रोजर फेडरर जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी हारे हैं। तुम इनसे प्रेरणा ले सकती हो।’ इसी सलाह ने मुझमें फिर से ऊपर उठने का जज्बा भरा और इसका नतीजा सबके सामने है। इसके अलावा मेरे दिल में यह ख्वाहिश बाकी थी कि मुझे अगले ओलंपिक खेलों में देश के लिए मेडल जीतना है। इस बार मेडल लाने का इरादा और पक्का है। इस जज्बे ने निराशा को काफी हद तक दूर किया।





स्ट्रेस दूर करने के लिए..





मैं स्पोर्ट्स चैनल देखना पसंद करती हूं, जिससे सारा तनाव पल में दूर हो जाता है। खेलों में सबसे ज्यादा बैडमिंटन और टेनिस देखना पसंद करती हूं। जब कभी टेंशन में होती हूं, तो अकेले बैठकर पुराने मैच देखने से मेरा मूड अच्छा हो जाता है।





फिल्में देखने..





फिल्में देखने का वक्त नहीं मिल पाता। बैडमिंटन प्रैक्टिस का शिडच्यूल टाइट रहता है। सुबह छह बजे उठने के बाद शाम तक प्रैक्टिस चलती रहती है। सिर्फ संडे को थोड़ा वक्त मिलता है। उस दिन घर में रहना पसंद करती हूं और परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारती हूं।





वक्त गुजारना बेहद पसंद..





पैरेंट्स के साथ। दोनों ने मेरे लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं। पापा ने हिसार छोड़ा और मेरे लिए हैदराबाद आए, ताकि मुझे बैडंिमंटन की बढ़िया कोचिंग मिल सके। बैडमिंटन का नेट तैयार करने के लिए मां मुझे अपनी साड़ियां दिया करती थीं।





पसंदीदा खिलाड़ी..





सचिन तेंडुलकर और स्टेफी ग्राफ हैं। दोनों ही खिलाड़ियों का अनुशासन, निष्ठा और उपलब्धियां गजब की हैं। स्टेफी को खेलते हुए देखने से बड़ी कोई खुशी नहीं हो सकती। वह पावरहाउस थीं। ये दोनों किसी भी खेल से ताल्लुक रखने वाले खिलाड़ियों के आइडल हैं।





किताबें पढ़ने..





किताबें पढ़ने का वक्त मुश्किल से मिलता है। हां, अखबारों के स्पोर्ट्स पेज हमेशा पढ़ती हूं।





खुद से नाराजगी..





भी होती है कभी-कभी। कोर्ट पर नेगेटिव पॉइंट देने से खुद पर काफी खीझ और गुस्सा आता है। इसलिए मैं प्रकाश पादुकोण जैसा बनना चाहती हूं, जो बड़ी मुश्किल से नेगेटिव पॉइंट देते थे।





मां के हाथ का खाना..





मुझे बहुत अच्छा लगता है और वह भी शाकाहारी। होटल या रेस्तरां में खाने से हमेशा बचती हूं।





जिंदगी बदलने..





में गोपी सर का बहुत हाथ रहा। न केवल मेरे लिए, बल्कि बहुत से बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए उन्होंने अपनी निजी जिंदगी का बलिदान दिया मैं अपने पैरेंट्स के बाद सबसे ज्यादा उनका ही सम्मान करती हूं।


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