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राजस्थान की संस्कृति साकार हुई

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - नागौर
राजस्थान की संस्कृति बुधवार को नागौर के पशु प्रदर्शनी मैदान के मंच पर रंग-रंगीली प्रस्तुतियों के जरिए साकार हुई। अवसर था पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे नागौर-मेला-2014 के दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या का। शाम साढ़े सात बजे शुरू हुए कार्यक्रम की शुरुआत श्रवण कुमार शंखवास के मष्क वादन के साथ हुई। कार्यक्रम में छंवरलाल गेहलोत एंड ग्रुप के कच्छी घोडी नृत्य, उमर फारूखा एंड ग्रुप के भपंग वादन, हरिकेश एंड ग्रुप के सहरिया नृत्य, मुकेश नाथ एंड ग्रुप के कालबेलिया नृत्य ने पर्यटकों व स्थानीय लोगों का मन मोहा। वहीं कालूदास एंड ग्रुप के तेरहताली नृत्य व अशोक शर्मा एंड ग्रुप की ब्रज होली प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय कर दिया तो कचरूद्दीन के समूह ने कुचामनी ख्याल की मनोरंजक व हास्य लोक नाट्य कला को मंच पर उतारा। अखे खां एंड ग्रुप ने लोक गायन के जरिए राजस्थान की विभिन्न गाथाओं तथा यहां के वीरों की गाथा को प्रस्तुत किया।
पर्यटन विभाग की इस संध्या में कलक्टर डॉ. वीना प्रधान, अतिरिक्त कलक्टर जवाहर चौधरी, सहायक कलक्टर ए.एच. गौरी सहित विभिन्न अधिकारी, विदेशी पर्यटक तथा गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।
नागौर मेला-2014 के तीसरे दिन गुरुवार को पपेट शो, घोड़ा नृत्य प्रतियोगिता, ऊंट नृत्य प्रतियोगिता होंगी। वहीं शाम सात बजे नगर परिषद नागौर द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध राजस्थानी लोक गायिका सीमा मिश्रा की प्रस्तुतियां होंगी।