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लैला के फार्महाउस में दो को जिंदा ही दिया था दफना

9 वर्ष पहले
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मुंबई.नाशिक के पास इगतपुरी में लैला खान के फार्महाउस में 2 लोगों को जिंदा ही दफना दिया गया था। यह खुलासा इस मामले में मुख्य आरोपी परवेज इकबाल टाक ने पुलिस के सामने किया है। टाक का कहना है कि 6 में से 2 को जब दफनाया गया तो उनकी सांसें चल रही थीं। टाक ने यह भी माना है कि बुरी तरह से ज़ख़्मी दो लोगों की सांसें चलने की वजह से उनके ऊपर मिट्टी डालने से पहले पत्थर और टाइल्स की एक परत डाल दी गई थी, ताकि वे चाहकर भी गड्ढे से न निकल पाएं।


पुलिस ने इगतपुरी फार्महाउस के गड्ढे से मंगलवार को 6 नरकंकाल बरामद किए थे। सभी नरकंकाल फार्महाउस के पीछे 8 फुट चौड़े, 12 फुट लंबे और 6 फुट गहरे एक गड्ढे से बरामद किए गए थे। ये सभी नरकंकाल तीन-तीन के दो सेट में ऊपर-नीचे रखे गए थे। दोनों सेट पत्थर और टाइल्स की परत से अलग-अलग किए गए थे। गड्ढे में सबसे ऊपर मिला कंकाल सेलिना का माना जा रहा है। हालांकि, गड्ढे से निकाले गए कंकाल किसके हैं, इसकी अंतिम पुष्टि के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है।

मुंबई के जेजे अस्पताल ने पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट शुक्रवार को पुलिस को सौंप दी है। रिपोर्ट में सभी 6 लोगों की मौत से पहले उन्हें चोट लगने की बात कही गई है। अस्पताल ने सभी कंकालों से डीएनए सैंपल लेकर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। अस्पताल का एनॉटमी विभाग कंकालों का लिंग परीक्षण करेगा।


टाक ने पुलिस को पूछताछ में जानकारी दी है कि उसने सबसे पहले सेलिना के सिर पर रॉड से वार किया। जैसे ही वह गिरी उसके सभी बच्चे टाक पर टूट पड़े। इसी दौरान टाक ने शाकिर को आवाज़ लगाई। टाक के मुताबिक शाकिर ने लैला उसकी बहनों-हजमीना, जारा और उसकी रिश्तेदार टिलू और लैला के भाई इमरान के सिर पर एक भारी रॉड से हमला किया। यह लड़ाई करीब डेढ़ घंटे तक चली। इसके बाद टाक और शाकिर ने सभी को गड्ढे में दफना दिया। लेकिन दफनाते समय दो की सांसें चल रही थीं। क्राइम ब्रांच के अधिकारी टाक के दावों का मिलान फॉरेंसिक रिपोर्ट से भी करने की तैयारी में हैं।


मुंबई क्राइम ब्रांच सभी नरकंकालों की टॉक्सीकोलॉजी टेस्ट भी करवा रही है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि क्या लैला और उसके परिवार के लोगों को मारने से पहले उन्हें ज़हर या ड्रग्स दिया गया था या नहीं।


अगर ऐसा पाया गया कि उन्हें ड्रग्स वगैरह दिया गया था तो पुलिस की इस थियरी को बल मिल सकता है कि सभी हत्याएं एक साजिश के तहत पहले से ही योजना बनाकर की गईं और यह किसी बात पर आपा खोने की वजह से नहीं हुई थीं।



मुंबई पुलिस के ज्वॉइंट कमिश्नर हिमांशु रॉय ने कहा, 'चूंकि, लोगों ने इस बात पर शक जताया है कि कैसे 2 लोग छह लोगों पर भारी पड़ गए। इसी वजह से पुलिस ने यह टेस्ट करवाने का फैसला किया है।'

इस बीच, परवेज टाक से पुलिस की पूछताछ में एक नई बात भी सामने आई है। टाक का कहना है कि सेलिना उससे झूठ बोलती थी कि आसिफ शेख उसका पति नहीं उसका भाई है। वह कहती थी कि उसका पहला पति नादिर पटेल मर चुका है। जबकि वह जिंदा था।



जब परवेज को पता लगा कि उसका पहला पति जिंदा है और सेलिना अपनी सारी प्रापॅर्टी अपने दूसरे पति आसिफ के नाम करना चाहती है तो उससे यह बात बर्दाश्त नहीं हुई और उसने इस परिवार के छह लोगों को मौत के घाट उतार दिया। परवेज ने जब एक दिन लैला के पिता नादिर शाह पटेल को लैला के घर पर देखा तो उसने इस बारे में लैला और उसकी बहन से सवालात किए, जिसके बाद इस सच का खुलासा हुआ।



टाक ने बताया कि लैला की मां सेलिना अपनी सारी प्रापर्टी आसिफ के हवाले कर सोनू के साथ दुबई जाकर बसना चाहती थी। लेकिन परवेज का पासपोर्ट न होने की वजह से वह नाराज था। इसके अलावा उसे पूरे परिवार के दुबई जाकर बस जाने की जानकारी भी नहीं थी। परवेज के मुताबिक वह सेलिना को मारकर उसकी हत्या को पूरे परिवार से छिपाना चाहता था।


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