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कभी भी सरकार कर सकती है तबादला

9 वर्ष पहले
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मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि विशेष परिस्थितियों में सरकार को नियुक्ति का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अधिकारियों का तबादला करने का अधिकार है। इस फैसले के साथ अदालत ने एकपक्षीय जांच के दोषी वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के तबादले को सही ठहराया।



मामला पुलिस अधिकारी संजीव कोकिल का है। जिनका तबदला पहले मुंबई से अमरावती फिर वहां से शस्त्र पुलिस (लोकल आर्मड पुलिस डिवीजन) में किया गया था। तबादले से नाराज कोकिल ने पहले महाराष्ट्र प्रशासकीय पंचाट(मैट) में याचिका दायर की थी। लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली।



लिहाजा मैट के बाद कोकिल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर व न्यायमूर्ति वीके ताहिलरमानी की खंडपीठ ने कोकिल की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी दलीलों को खारिज कर दिया। इसमें कहा गया है कि एक पोस्टिंग पर तीन साल के बाद ही तबादला किया जा सकता है।



खंडपीठ ने कहा कि कानून में ऐसा है लेकिन विशेष मामलों में सरकार पुलिस अधिकारी का कार्यकाल पूरा होने से पहले भी उसका तबादला कर सकती है। कोकिल पर मामलों की जांच के दौरान पक्षपात करने का आरोप था। इसके कारण उनका तबादला मुंबई से पहले अमरावती फिर स्थानीय शस्त्र बल में किया गया था।



राज्य सरकार ने 7 फरवरी 2011 को भेजे गए पत्र के जरिए कोकिल के तबादले के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। सरकार ने यह मंजूरी कोकिल के खिलाफ एमआरए मार्ग पुलिस स्टेशन में काम के दौरान मिली शिकायतो को देखते हुए दी थी।



सुनवाई के दौरान कोकिल के वकील अनिल अंतुडकर ने खंडपीठ के समक्ष कहा कि यदि उसके मुवक्किल का तबादला विशेष मामला मान कर किया गया है तो अधिकारियों को तबादले के कारणों का उल्लेख करना चाहिए लेकिन तबादले के फैसले में कहीं भी कारणों का जिक्र नहीं किया गया है।



इस पर खंडपीठ ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कोकिल के तबादले के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे पहले कई स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों ने तबादले पर विचार किया है। खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को दंड के रूप में राज्य के किसी पिछड़े इलाके में नहीं भेजा गया है। कोकिल का तबादला प्रशाकीय कारणों से जरूरी समझा गया है। इसके बाद सरकार ने उनका तबादला किया है।



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