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एक गैस जिसने पल भर में ले ली हजारों की बलि, शहर बन गया लाशों की नगरी

8 वर्ष पहले
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भोपाल। 02 दिसंबर 1984 का काला इतिहास शायद कोई भूल ना सकेगा। कड़ाके की ठंड आधी रात जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे अचानक उनका दम घुटना शुरू हो गया। एक फैक्ट्री जिसके आस-पास रहने वाले लोग देखते ही देखते तड़पने लगे और उनकी मौत भी होने लगी। लोग जान बचाने के लिए अपना सामान लेकर इधर-उधर भागने लगे। आंखों में जैसे मिर्च पाउडर लग गई हो और उन्हें कुछ दिख भी नहीं रहा था। मन में केवल एक चाह ‘हे भगवान’ जान बचा लो। लोग भागे जा रहे थे। अभी कुछ ही पल बीते थे कि यही हाल पूरे शहर में नजर आने लगा।
शहर के हर कोने से खबरें आने लगी कि लोगों की तड़प-तड़प कर मौत हो रही है। ऐसा लग रहा था जैसे मौत लोगों का पीछा कर रही हो। इंसान ही नहीं जानवर भी मौत की आगोश में समाते जा रहे थे। कुछ समझ नहीं आ रहा था अचानक यहां की हवा में ऐसा क्या हो गया कि सांस लेते ही लोगों की जान जाने लगी।
कुछ पल बिता कई सड़कें, कई गलियां, कई घर लाशों से पट पड़े थे। यहां के सबसे बड़े अस्पताल में घायल और लाश में अंतर करना मुश्किल हो रहा था। आनन-फानन में पोस्टमार्टम हो रहे थे और लाशों को ले जाने के लिए ट्रक भी खड़े हो गए। अगली सुबह एक साथ हजारों लोगों की अर्थियां निकली और अंतिम संस्कार हुआ।
यह भयावह दृश्य था गैस त्रासदी का। इस दिन विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैसकांड की घटना हुई थी। जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था, जिसने देखते ही देखते हजारों लोगों को मौत की आगोश में ले लिया था। जो बचे वो संक्रमण से इस कदर प्रभावित हुए कि उन्हें विकालांग की जिंदगी बितानी पड़ी। 02 दिसंबर की आधी रात इस फैक्ट्री से मिथाइल आइसोनेट (एमआईसी) का रिसाव हुआ और हजारों जिंदगी काल की गाल में समा गई। भोपाल गैस त्रासदी के 29 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा उसी गैस त्रासदी से जुड़ी कुछ खास बातें।
स्लाइड क्लिक कर जानें आखिर क्या था पूरा मामला और कैसे पूरा शहर इससे हो गया था प्रभावित...
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